योग जीवन को संतुलित, स्वस्थ एवं सकारात्मक बनाने की कला है : योगाचार्य अमरपाल

शिविर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं योग साधकों ने सहभागिता करते हुए योगाभ्यास का लाभ प्राप्त किया

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित निःशुल्क नित्य योग शिविर के दसवें दिन का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं प्रार्थना के साथ अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं योग साधकों ने सहभागिता करते हुए योगाभ्यास का लाभ प्राप्त किया। 

इस अवसर पर योगाचार्य अमरपाल ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ एवं सकारात्मक बनाने की एक संपूर्ण जीवन-पद्धति है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जीवनशैली, तनाव एवं अनियमित दिनचर्या के कारण अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। योग इन सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाने का एक प्रभावी माध्यम है।योगाचार्य अमरपाल ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में बताए गए योग के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि योग न तो अधिक खाने वालों का सिद्ध होता है और न ही अत्यधिक सोने वालों का। इसी प्रकार योग कम खाने अथवा अत्यधिक त्याग करने वालों के लिए भी सिद्ध नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को संदेश देते हुए कहा है कि योग उन्हीं व्यक्तियों का सिद्ध होता है जो अपने जीवन में संतुलन, संयम और सहजता को अपनाते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने खान-पान, व्यवहार, कार्यशैली एवं दिनचर्या में संतुलन बनाए रखना चाहिए। यही योग का वास्तविक संदेश है। उन्होंने कहा कि योग का उद्देश्य केवल शरीर को स्वस्थ बनाना नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना भी है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता में वृद्धि होती है तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।

योग सत्र के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न सूक्ष्म व्यायामों का अभ्यास कराया गया, जिससे शरीर के जोड़ों एवं मांसपेशियों को सक्रिय और लचीला बनाया जा सके। इसके पश्चात पर्वतासन, त्रिकोणासन, नौकासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया। योगाचार्य ने इन आसनों के शारीरिक एवं मानसिक लाभों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इनके नियमित अभ्यास से शरीर में संतुलन, शक्ति एवं लचीलापन बढ़ता है तथा पाचन तंत्र, रीढ़ एवं मांसपेशियां सुदृढ़ होती हैं। प्राणायाम सत्र में नाड़ी शोधन, चंद्रभेदी, शीतली एवं भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। योगाचार्य ने बताया कि नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर की ऊर्जा नाड़ियों को संतुलित करता है, चंद्रभेदी प्राणायाम मानसिक शांति प्रदान करता है, शीतली प्राणायाम शरीर को शीतलता एवं ताजगी देता है, जबकि भ्रामरी प्राणायाम तनाव, चिंता एवं मानसिक अशांति को दूर करने में अत्यंत लाभकारी है।शिविर में उपस्थित प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक ऊर्जा का अनुभव किया तथा नियमित योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर डॉ. धर्मेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार त्यागी, पुष्पेंद्र कुमार, शिवानंद, नंदिनी, ओजस्वी, राधा, ज्योति सहित अनेक योग साधक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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