नशाखोरी पर रोक जरूरी
 इलमा अज‍़ीम 
देश में बढ़ता नशा चिंता का विषय है। यह एक गंभीर राष्ट्रीय संकट बन चुका है। यह नशा विशेषकर युवाओं और किशोरों में बहुत अधिक बढ़ रहा है। स्कूल और कॉलेजों के छात्रों को नशा करते हुए देखा जा सकता है। नशे का इस प्रकार बढ़ता प्रचलन एक गंभीर सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह समस्या केवल शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांव में भी तेजी से फैल रही है। हेरोइन, कोकीन और चिट्टा आदि नशे बहुत अधिक खतरनाक हैं। इस तरह के नशे पारंपरिक नशे से भी कई गुणा भयानक हैं। 

नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है जिससे एचआईवी हेपेटाइटीज का खतरा बढ़ रहा है। नशा हमारे देश की युवा पीढ़ी को दीमक की तरह चट कर रहा है।  देश में नशा क्यों बढ़ रहा है, यह गंभीर चिंतन का विषय है। देश और युवा वर्ग तथा किशोरों के भविष्य को देखते हुए इस नशे पर लगाम लगानी ही होगी। दूसरे देशों से होने वाली नशे की तस्करी को सख्ती से रोकना होगा। तस्करों पर लगाम लगाने के लिए सख्त से सख्त कानून बनाने होंगे ताकि वे लोग ऐसा घिनौना कार्य करने से पहले दस बार सोचें। 

क्योंकि धन के लालच में जो लोग देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, किसी भी सूरत में बचने नहीं चाहिए। हमें नशे की रोकथाम के लिए केवल सरकार पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए अपने स्तर पर भी प्रयास करने होंगे। अपने बच्चों को ऐसे संस्कार देने होंगे कि वे नशे से दूर रहें। इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज में भी अध्यापकों के साथ लगातार संपर्क बनाकर रखना होगा, ताकि अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। 

नशा न केवल शारीरिक नुक्सान पहुंचाता है बल्कि आर्थिक रूप से भी कंगाल बना देता है। हेरोइन और कोकीन या चिट्टा आदि ऐसे नशे हैं जिनसे छुटकारा पाना तो बहुत ही मुश्किल है, कई बार तो इसके अधिक सेवन करने से मौत भी हो जाती है। शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा, तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं होगा। वह युवा या व्यक्ति अपने घर, समाज और अपने देश के लिए कुछ नहीं कर सकता। इसलिए नशाबाजी रोकने के लिए ठोस उपाय करने होंगे।

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