मध्य गंगा नहर पर चला स्वच्छता अभियान, छात्रों ने दिया स्वच्छ पर्यावरण का संदेश 

 मेरठ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुभारती विश्वविद्यालय की यूनिवर्सिटी एनवायरमेंट कमेटी द्वारा हस्तिनापुर रेंज में "कैंपस टू कंजर्वेशन" गतिविधि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने मध्य गंगा नहर पर स्वच्छता अभियान चलाया, पौधारोपण किया तथा जैव विविधता एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाया।

स्वच्छता अभियान के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने श्रमदान करते हुए मध्य गंगा नहर के किनारों पर फैले प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य ठोस अपशिष्ट को एकत्रित किया। विद्यार्थियों ने आमजन से अपील की कि नदियों एवं जल स्रोतों में पूजा-पाठ से संबंधित सामग्री, प्लास्टिक अथवा अन्य अपशिष्ट सीधे प्रवाहित न करें। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है। पूजा सामग्री के उचित निस्तारण से नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रतिभागियों ने वानिकी प्रशिक्षण केंद्र का भ्रमण किया, और छात्रों ने टर्टल हैचरी को भी देखा। साथ ही डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को गंगा पारिस्थितिकी तंत्र और जलीय जीवों के संरक्षण के विषय में जानकारी दी।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बिजनौर प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. गौरा चंद्र दास, लीड-एक्वाटिक हैबिटेट एंड स्पीशीज़, ने विद्यार्थियों को गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल एवं अन्य जलीय जीवों के संरक्षण में स्वच्छ नदियों की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी सुरक्षा सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

इसी क्रम में डॉ. अमान उल्ला खान, एसोसिएट कोऑर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, बिजनौर प्रोजेक्ट ऑफिसर, ने विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण, मानव-प्रकृति संबंध और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं को प्रकृति संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत वानिकी प्रशिक्षण केंद्र परिसर में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों द्वारा पौधारोपण भी किया गया। यूनिवर्सिटी एनवायरमेंट कमेटी के चेयरपर्सन प्रो. डॉ. मुकेश रुहेला ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि सतत जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से एक पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल का भी संकल्प लेने का आह्वान किया।

वहीं डॉ. संचित प्रधान ने संदेश दिया कि स्वच्छता, जल संरक्षण, जैव विविधता और वृक्षारोपण एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं तथा पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत अपने आसपास के परिवेश को स्वच्छ और सुरक्षित रखने से होती है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. नेशमा, डॉ. श्रेया पवार, डॉ. अमृता, डॉ. प्रीति, डॉ. दामिनी, डॉ. प्रियदर्शनी, पार्थ मलहोत्रा, आशुतोष, डॉ. आदिल, डॉ मोनिका तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा।

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