मौत बुला रही है सेल्फ़ी खिंचा रही है

- आसिम अनमोल

मौत की प्रतीक होगी सेल्फ़ी यह किसे पता था। सेल्फ़ी नामक मौत की आकस्मिक घटनाएँ तीव्र गति से होनी शुरू हो जाएँ तो कलम का हुंकार भरना लाज़िमी बनता है। सेल्फ़ी लेना जब हमारे नसीब में नहीं था। हम बिना किसी अड़चन के प्राकर्तिक तरीके से बाक़ायदा अर्थी पर सज धजकर टाइम से परमात्मा के यहाँ चले जाते थे। जब से हम सेल्फ़ी वाले बने हैं , तब से मौत मोबाइल के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है।

सेल्फ़ी ने मौत को इतनी आसानी से अपने करीब कर लिया है कि बंदा ट्रेन में हो तो बर्थ सीठ छोड़कर सीधे डिब्बे के ऊपर छैय्याँ छैय्याँ की तर्ज़ पर विद मौत के सेल्फ़ी लेने चले जाने में गर्वान्वित महसूस कर रहा  है। मौत भी सम्मान से आने का प्रयास कर रही है। सेल्फ़ी वालों की सेल्फ़ी भी हो रही है। सब भली भांति जानते हैं कि संसार में हर इंसान को अपनी अपनी पड़ी है। कोई तो मेरी तस्वीर खींचने से रहा। जीवन के हर सकारात्मक मौके गँवाने में इंसान अव्वल दर्ज़ा हासिल करने में लगा हुआ है।   लेकिन सेल्फ़ी लेना उसने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है । इधर सरकार पुलों को स्थापित करती आ रही है लोंगो के आवागमन के लिए। पुल लोंगो की आवाजाही से कम पुलों पर आधुनिक अंदाज़ में खड़े होकर सेल्फ़ी लेने के कारण ज़्यादा प्रख्यात होते जा रहे हैं।

इंसान को अब मौत से डर नहीं लग रहा है । अगर हाथ में स्मार्टफोन सेल्फ़ी वाला मोबाइल उपलब्ध नहीं है तो ज़माने वालों के सामने स्टेटस का कचरा होने का भय सता रहा है । डर का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी हावी रहता है। मौत तो सबको ही आनी है। सेल्फ़ी लेते वक़्त मौत को अग़र पब्लिक स्टंट मिल जाएगा तो मौत की टी.आर.पी.भी बढ़ जाएगी । ऐसे हालातों में देश के चैनल भी दुखद हादसों की ख़बरों के दरिया में डुबकी लगा लेने में संकोच नहीं करते । सेल्फ़ी खुद एक   पावर बनकर उभर रही है। सेल्फ़ी के बग़ैर हम कई दिन तक कपड़े तक नहीं बदलते। सेल्फ़ी है तो नए नए ब्रांडेड कपड़े पहनने का जूनून सवार रहता है। यह अलग़ बात है कि अब जीवन भगवान के हाथ न होकर सेल्फ़ी वाले मोबाइल के हाथों में पहुँच गया है। मौत भी अब प्राकर्तिक नहीं रही।

मौत सांसारिक हो गई है । मौत ने भी अब सेल्फ़ी वाले मोबाइल से टाई अप कर लिया है। ज़िंदा रहना है तो रहो। वरना सेल्फ़ी लेते लेते भी भगवान के पास जा सकते हो। एक बार एक फैमिली बाज़ार करने जा रही थी। एक सांसद महोदय का वहां से गुज़रना हुआ। हस्बैंड ने जैसे ही सांसद को देखा। बीवी बच्चे भूलकर सांसद के पीछे एक सेल्फी हो जाए लेने चले गए। इधर भीड़ भाड़ में न जाने किसी ने अपनी बाइक बीवी बच्चों पर चढ़ा दी। बीवी बच्चे घायल। जनता भी यह सब देखकर बीवी बच्चों की सेल्फी लेने में लग गई । किसी ने मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। सेल्फी लेने के लिए सैकड़ों हाथ आ गए। हस्बैंड भी सांसद के साथ ली गई सेल्फी चेक करते हुए अपनी बीवी बच्चों के पास आए तो हक्का वक्का रह गए। इधर पब्लिक घायल बीवी बच्चों की सेल्फी लिए जा रही थी  उधर हस्बैंड सेल्फी लेने वालों के मुँह ताक रहा था।
(शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश)

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