1.39 करोड़ के विद्युत घोटाले में तत्कालीन जेई 18 साल के बाद गिरफ्तार 

जनप्रतिनिधियों के 200 से ज्यादा फर्जी लेटर पैड तैयार कर कराए थे नलकूप कनेक्शन

विभाग में मचा हड़कंप,मामले का खुलासा होने के बाद जांच हुई थी शुरू कई अन्य निशाने पर

मेरठ। मेरठ के आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने विद्युत विभाग में लगभग 1 करोड़ 39 लाख के घोटाले में तत्कालीन जूनियर इंजीनियर ब्रिजेश कुमार को 18 साल के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर के एसपी डॉ. राजीव दीक्षित ने बताया कि मुजफ्फरनगर कोतवाली में एक मुकदमा 576/08 वर्ष 2008 में कराया गया था। बताया कि वर्ष 2006-07 में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की सामान्य योजना के तहत मुजफ्फरनगर और शामली क्षेत्र में निजी नलकूपों के विद्युतीकरण का कार्य किया जाना था।

आरोप है कि योजना के लक्ष्यों की पूर्ति किए बिना ही फर्जी अभिलेख और रिपोर्ट तैयार कर लगभग 200 निजी नलकूपों को ऊर्जीकृत दिखा दिया गया।इस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों के फर्जी लेटर पैड इस्तेमाल किए गए इनके आधार पर ही कनेक्शन दिए गए। इस मामले में खुलासा होने के बाद जांच शुरू हुई थी। जांच में पाया गया कि इस घोटाले से उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन को करीब 1.39 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया।मामले में तत्कालीन जूनियर इंजीनियर ब्रजेश कुमार पर फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर उपभोक्ताओं को कनेक्शन दर्शाने और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा था। इसी को लेकर मुकदमा हुआ था।जांच ईओडब्ल्यू को दी गई थी। मेरठ सेक्टर ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन जूनियर इंजीनियर ब्रजेश कुमार गिरफ्तार किया है।

धोखाधड़ी-जालसाजी की धाराओं में दर्ज है केस

मामले में थाना कोतवाली मुजफ्फरनगर में धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 477-ए एवं 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया था। उधर, ईओडब्ल्यू की विवेचना में ब्रजेश कुमार समेत अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts