तपती धरती कारण और हम

उत्तर भारत के कई राज्य इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इन राज्यों में कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री से लेकर 44 डिग्री तक पहुंच गया है। पिछले दिनों भारतीय  मौसम विज्ञान विभाग द्वारा हीटवेव अलर्ट भी जारी किया जा  चुका है। मौसम विभाग ने अपनी चेतावनी में लू चलने और तापमान में  4 डिग्री तक बढ़ोतरी होने की संभावना को लेकर लोगों को सचेत किया है। पिछले कुछ वर्षों से लगभग हर साल गर्मी के तापमान में इज़ाफ़ा होता ही जा रहा है।

 जीवन के लिये एकमात्र ग्रह पृथ्वी गत दो दशकों से ग्लोबल वार्मिंग का निरन्तर प्रभाव झेल रही है। इसके अलावा भी वैज्ञानिकों द्वारा भारत में तेज़ गर्मी के और भी कई कई कारण बताये जा रहे हैं। इन कारणों में ख़ासकर जलवायु परिवर्तन के अलावा हीट डोम और अल नीनो प्रभाव को रेखांकित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसों से वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। इसने  हीटवेव की तीव्रता और इसकी अवधि दोनों को ही बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि 2026 में दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 92 शहर केवल भारत में हैं। इन गर्म क्षेत्रों में केवल दिन ही नहीं बल्कि यहां की रातें भी गर्म रहती हैं। इसे ‘सीवियर वार्म नाइट’ कहते हैं। 

यह स्थिति जलवायु परिवर्तन का ही नतीजा है। इसी के साथ गर्मी को बढ़ने में अनियंत्रित शहरीकरण की भी बड़ी भूमिका है। देश में चारों ओर खेत व जंगल वृक्ष निरन्तर कम होते जा रहे हैं। और शहरीकरण के नाम पर कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं। लिहाज़ा ‘अर्बन हीट आइलैंड’ का प्रभाव और कंक्रीट-आधारित विकास इसके लिए ख़ासकर ज़िम्मेदार हैं। यह कंक्रीट के जंगल दिन में गर्मी को सोखते हैं और रात में इसे छोड़ते हैं। उधर शहरों में होती जा रही पेड़-पौधों की कमी से वातावरण में नमी घटती जा रही है। 

यही वजह है कि दिल्ली व अहमदाबाद जैसे महानगरों में रातें पूर्व की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक गर्म होने लगी हैं। ऐसे में सबसे ज्वलंत प्रश्न यही है कि आख़िर तापमान वृद्धि की ज़िम्मेदार हमारी वर्तमान पीढ़ी क्या अपनी आने वाली नस्लों को भी ऐसी ही या इससे भी अधिक तपती पृथ्वी देकर जायेगी या इससे बचने के कुछ उपाय करना चाहेगी ? इसके लिये सबसे पहले भारतीय शहरों में हरित आवरण को विस्तार देने की सख़्त ज़रूरत है। बहरहाल भविष्य में तापमान वृद्धि से बचने व इसके दीर्घकालिक उपाय करने के साथ साथ तात्कालिक रूप से शरीर पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभाव से बचाव करना भी बेहद ज़रूरी है। 

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