ममता बनर्जी के इस्तीफे न देने से नहीं होगा संवैधानिक संकट
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने दी बड़ी प्रतिक्रिया
पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने ममता बनर्जी के रुख को बताया 'लोकतांत्रिक सिद्धांतों का अपमान', की अमेरिकी कैपिटल हिल हिंसा से तुलना
नई दिल्ली। भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और दिग्गज वकील हरीश साल्वे ने पश्चिम बंगाल के वर्तमान राजनीतिक गतिरोध पर कड़ा रुख अपनाया है। आईएएनएस से एक खास बातचीत में साल्वे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा न देने के फैसले से कोई 'बड़ा संवैधानिक संकट' पैदा नहीं होगा, क्योंकि भारतीय संविधान में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं।
हरीश साल्वे ने संवैधानिक प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद कुर्सी नहीं छोड़ता, तो राज्यपाल के पास महत्वपूर्ण शक्तियां होती हैं। राज्यपाल या तो मौजूदा मुख्यमंत्री को कार्यवाहक (Caretaker) के रूप में कार्य करने की अनुमति दे सकते हैं या राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता का हवाला देकर केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।
कैपिटल हिल जैसी स्थिति की आशंका और संस्थाओं पर हमला
साल्वे ने ममता बनर्जी के अड़ियल रुख की तुलना 2021 की अमेरिकी कैपिटल हिल घटना से करते हुए कहा, "उम्मीद है कि वह कोलकाता में ऐसी स्थिति पैदा करने की योजना नहीं बना रही हैं।" उन्होंने ममता द्वारा चुनाव आयोग को 'विलेन' बताने और नतीजों को 'वोट चोरी' कहने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अपमान है।
केजरीवाल के रवैये से की तुलना
वरिष्ठ वकील ने ममता बनर्जी के व्यवहार की तुलना दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हालिया बयानों से की, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका पर पक्षपात के आरोप लगाए थे। साल्वे ने कहा कि यह संस्थाओं को डराने-धमकाने की एक कोशिश है। संदेश यह देने की कोशिश की जाती है कि "यदि फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया, तो हम आपकी पृष्ठभूमि खंगालेंगे।"
चुनाव पूरी तरह वैध
चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए साल्वे ने कहा कि पश्चिम बंगाल का चुनाव संवैधानिक रूप से पूरी तरह वैध है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इससे जुड़ी आपत्तियों और मामलों को खारिज कर दिया था। ऐसे में 'वोट चोरी' जैसे आरोप केवल संवैधानिक शपथ का उल्लंघन हैं।


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