सेंट्रल मार्केट में व्यापारियों ने  छाती पीट-पीटकर किया  प्रदर्शन

 जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने पर व्यापारियों में दिखा आक्रोश 

मेरठ। सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को व्यापारी सड़क पर उतर आए। उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। कुछ व्यापारियों ने छाती पीट-पीटकर अपना विरोध जताया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

 सुप्रीम कोर्ट ने 80 भूखंड मालिकों के खिलाफ आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा- आवासीय प्लॉट पर चल रही कमर्शियल एक्टिविटी को हटाया जाए। इस पर आवास विकास से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अधिकारी समय पर रिपोर्ट नहीं दे सके।इसके बाद 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई। कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद से जवाब मांगा। 24 घंटे के अंदर 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया।मंगलवार को प्रशासन ने 44 संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी। इनमें आवासीय प्लॉट पर चल रहे स्कूल, बैंक और नर्सिंग होम भी शामिल हैं। कार्रवाई के विरोध में सोमवार रात से ही सेंट्रल मार्केट और आसपास के इलाकों में हंगामा शुरू हो गया था। देर रात से मार्केट में पुलिस बल तैनात रहा। मंगलवार को व्यापारियों में सीलिंग की कार्रवाई को लेकर आक्रोश साफ दिखााई दिया। जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने पर व्यापारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस दौरान व्यापारियों ने छाती -पीटपीट कर प्रदर्शन किया। व्यापारी सैंट्रल मार्केट के व्यापारी के नारे लगाते नजर आए । 

सुप्रीम कोर्ट ने कमर्शियल गतिविधियां बंद करने का दिया आदेश

27 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के 80 भूखंड मालिकों को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने आवासीय प्लॉट पर चल रही कमर्शियल गतिविधियां बंद करने का आदेश दिया और आवास विकास से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। हालांकि, तय समय सीमा के भीतर यह रिपोर्ट दाखिल नहीं हो सकी।

इस बीच व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए आवास विकास ने समाधान पेश किया। भूखंड मालिकों को नोटिस देकर कहा गया कि वे शुल्क जमा कर अपने प्लॉट को आवासीय से कमर्शियल में बदल सकते हैं।

इसके लिए 36 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर तय की गई। साथ ही सेटबैक नियम के तहत दुकानों को पीछे करना भी जरूरी था। कई व्यापारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और नियमों के अनुसार बदलाव भी शुरू कर दिए।

24 घंटे में 44 संपत्तियां सील करने का आदेश

6 अप्रैल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा सख्ती दिखाई। कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद से जवाब मांगा। 24 घंटे के भीतर 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दे दिया। इन संपत्तियों में बैंक, स्कूल और अस्पताल भी शामिल हैं। कोर्ट ने इन्हें शिफ्ट कर सील करने को कहा।

आदेश के बाद संबंधित दुकानों को खाली कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर से यह भी पूछा कि उन्होंने ध्वस्तीकरण रोकने का आदेश किस आधार पर दिया।

उन्होंने सफाई दी कि संबंधित कॉम्प्लेक्स में कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी थी। जनप्रतिनिधियों की सहमति से निर्णय लिया गया था। बाद में उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल किया।

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