युद्धविराम का नया दौर
इलमा अज़ीम
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच शांति की राह खुलने से एक नई उम्मीद जगी है। एक माह से अधिक समय तक वार-पलटवार के बाद आखिरकार दोनों पक्ष दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं कि शुक्रवार से पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच समझौते को लेकर वार्ता शुरू हो सकती है। इस फैसले से दुनिया के उन देशों को भी फिलहाल राहत महसूस हो रही है, जिनका इस युद्ध से सीधे तौर कोई संबंध नहीं हैं, लेकिन होर्मुज जलमार्ग बाधित होने से उनके 4/8 और गैस का संकट पैदा हो गया है।
युद्धविराम के एलान का तात्कालिक असर यह हुआ कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़े दामों में अठारह फीसद की गिरावट दर्ज की गई। इससे निश्चित तौर पर तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, लेकिन सवाल है कि क्या युद्धविराम स्थायी शांति में तब्दील हो पाएगा? यह प्रश्न इसलिए अहम है, क्योंकि खबरों के मुताबिक ईरान ने अपने प्रस्ताव में जो शर्तें रखी हैं, उन पर आम सहमति कायम करना आसान नहीं होगा। खाड़ी देशों को जहां ईरान के मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा, वहीं भारत समेत कई अन्य देशों में तेल एवं गैस का संकट खड़ा हो गया। ईरान ने रणनीति के तहत हार्मुज जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई।
इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में उछाल से कई देशों में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन की कीमतें बढ़ गई। अब दो सप्ताह की युद्धविराम की घोषणा से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन उसके बाद भी हालात सामान्य रह पाएंगे या नहीं, इस संबंध में अभी अनिश्चितता बरकरार है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दोनों पक्षों की ओर से बातचीत की शर्तों को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। समझौता वार्ता में किस स्तर के प्रतिनिधि शामिल होंगे, इसका खुलासा भी अभी नहीं किया गया है। यह बात भी महत्त्वपूर्ण है कि इससे पहले अमेरिका की ओर से दिए गए समझौता प्रस्ताव को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया था। अब जिस प्रस्ताव पर युद्धविराम को लेकर सहमति बनी है, वह ईरान की ओर से पेश किया गया है।
हालांकि इसके साथ एक अहम शर्त भी रखी गई है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलना होगा, ताकि वहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने कई सैन्य लक्ष्य पहले ही हासिल कर चुका है और अब बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकालने पर ध्यान दे रहा है।

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