बम, मिसाइल और स्कूल बैग

- ललिता जोशी
अमरीका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध को एक महीने से अधिक का समय हो चुका है । ये युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है । एक देश दूसरे देश के ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी कर रहा है। इस युद्ध का उद्देश्य बस अपनी शक्ति का आतंक कायम कर दूसरे देश के तेल पर काबिज होकर और उनके तेल को उड़ाना और बम भी बजाना है ।
अरे भाई किसी के बम बजाओगे तो वो भी चुप नहीं रहेगा । आत्मरक्षा में वो भी कुछ करेगा । जब बात अपने सम्मान पर आ जाए तो फिर नतीजा बड़ा ही गंभीर होता है । ईरान ने अमरीका और इज़राइल की हेकड़ी निकाल दी है । कहाँ ये दोनों सुपरस्टार सोच रहे थे कि ये युद्ध पाँच-छ्ह दिन में ही समाप्त हो जाएगा लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं हुआ । एक अकेला इन दोनों देशों के साथ इनके समर्थन वाले अपने पड़ोसी देशों से भी टक्कर ले रहा है । अमरीका का तो ऐसा हाल किया है कि ट्रम्प जी आए दिन ऐसे -ऐसे बयान देते हैं जिससे उनके अपने देश में ही इनके विरोधी दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं । इनके बयान उपहास का कारण बने हुए हैं मजाल है कि जो इस बंदे को समझ पड़े ।
रोज दिन रात बयानबाजी कि एक -दो दिन में युद्ध समाप्त हो जाएगा लेकिन युद्ध तो समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा । इसका खामियाजा भोग रहा है सारा विश्व । ईरान के तेल के ठिकानों पर बम ऐसे गिर रहे हैं मानों बमों की प्रचंड बारिश हो रही है । आग, राख़ और धुएँ का गुब्बार रात को रात और दिन को दिन ही नहीं रहने देता । इन सब में आम आदमी की परेशानियों का कोई क्या ही अंदाजा लगा सकता है । ऐसे युद्धों में बेचारे बच्चे क्या रहे होंगे ? बाहर खेल नहीं सकते। जैसे -तैसे बच्चे स्कूल जा रहें है इसी बहाने से वो थोड़ा बाहर भी जा सकें और उन्हें भी ज्ञान प्राप्त हो सके और उनका भविष्य भी संवर पाये । माता -पिता अपने जिगर के टुकड़ों को जान हथेली पर रख कर स्कूल भेज रहे हैं लेकिन तेल के लिए उन्मत शासकों को सिर्फ तेल और तेल ही नज़र आ रहा है । जिसके लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं । इन्होनें अस्पताल ,कॉलेज और यहाँ तक की स्कूल को भी अपने निशाने पर ले लिया ।
ईरान के मेनाब में 100 से भी ज्यादा बच्चियाँ बमों के कारण काल के गाल में समा गईं । क्या कसूर था इन बच्चियों का ? उनके सपनों का जिसे पूरा करने के लिए उन्होने न जाने योजनाएँ बनाई होंगी । कितनी उमंग होंगी इन बच्चियों में लेकिन बम और मिसाइलों ने बच्चियों के साथ उन स्कूल  बैगों की  भी हत्या कर डाली जिनमें उनके अपने सपने  सुरक्षित रखे थे । अब उन सपनों के बैग को बम और मिसाइलनिगल गईं । खून से लथपथ मासूम बच्चियों के निष्प्राण शरीर  और जली हुई किताबें और बिखरे हुए स्कूल बैग। इस भयावह मंजर को जिसने भी देखा वो सभी  दहल गए। इतना सब होने पर भी ये लड़ाके थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं । किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है । फर्क तो उन अभिभावकों को पड़ा जिनहोने अपनी बच्चियों को खोया है ।
युद्ध शुरू हुए 35 से भी अधिक  दिन हो चुके हैं लेकिन ये थमने का नाम ही नहीं ले रहा है । तेल के कारण सभी का तेल निकला हुआ है। स्कूल की बच्चियाँ  और उनके स्कूल बैग इस तेल के लालच की भेंट चढ़ गए। तेल फिर भी अमरीका के हाथ न आया । उल्टे ही अपने शक्तिशाली फाइटर हवाई जहाजों  से हाथ धो बैठा ।
अमरीका इस युद्ध में अपनी शक्ति झोंक चुका है लेकिन हासिल क्या हुआ ?कोई भी देश इनके इस कृत्य में इनके साथ नहीं है। रोज ही युद्धविराम की घोषणाएँ भी तेल भीग कर जमीन पर गिर जाती हैं ।  बम और मिसाइल की धुआंधार बरसात हो रही है । इनकी मर्जी है ये चाहे जहां चाहें वहाँ गिरे। पुल, हवाई अड्डे, अस्पताल, कालेज, तेल के कुएं हों या फिर स्कूल । वाकई में बम, मिसाइल स्कूल बैग पर भारी पड़ रहे हैं । बच्चियाँ कुछ जानकार बन पाती इससे पहले ही वो अपनी जान खो बैठीं ।
(मुनिरका एंक्लेव, दिल्ली)

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