युवाओं में बढ़ती नशाखोरी
 
इलमा अज़ीम 
युवाओं में तेजी से बढ़ रही शराब की लत को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय-समय सचेत करते रहते हैं। शराब का सेवन शरीर को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। युवाओं के बीच शराब का सेवन एक चलन सा चल पड़ा है। शराब एक नशीला पदार्थ है, जिसको एक प्रकार का अवसाद भी माना जाता है। एक वैश्विक अध्ययन में यह खुलासा किया गया है कि युवाओं को ज्यादा उम्र वालों की तुलना में शराब के सेवन से अधिक स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ता है।

 एक अध्ययन में पाया गया कि 15 से 39 साल की उम्र के लोगों को शराब पीने पर ज्यादा खतरा होता है। हमारे समाज में नशे को सदा बुराइयों का प्रतीक माना और स्वीकार किया गया है। इनमें सर्वाधिक प्रचलन शराब का है। शराब सभी प्रकार की बुराइयों की जड़ है। शराब के सेवन से मानव के विवेक के साथ सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। वह अपने हित-अहित और भले-बुरे का अन्तर नहीं समझ पाता। शराब के सेवन से मनुष्य के शरीर और बुद्धि के साथ-साथ आत्मा का भी नाश हो जाता है। शराबी अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।
 
अमीर से गरीब और बच्चे से बुजुर्ग तक इस लत के शिकार हो रहे हैं। एक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार भारत में पांच में से एक शख्स शराब पीता है। सर्वे के अनुसार 19 प्रतिशत लोगों को शराब की लत है। जबकि 2.9 करोड़ लोगों की तुलना में 10-75 उम्र के 2.7 प्रतिशत लोगों को हर रोज ज्यादा नहीं तो कम से कम एक पेग जरूर चाहिए होता है और ये शराब के लती होते हैं। इस सर्वे की चौंकाने वाली बात यह है कि देश में 10 साल के बच्चे भी नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों में शामिल हैं। युवाओं में नशा करने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते शहरी और ग्रामीण अंचल में आपराधिक वारदातों में काफी इजाफा हो रहा है। 

शराब के साथ नशे की दवाओं का उपयोग कर युवा वर्ग आपराधिक वारदातों को सहजता के साथ अंजाम देने लगे हैं। हिंसा ,बलात्कार, चोरी ,आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है । शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादीशुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है । आजादी के बाद देश में शराब की खपत 60 से 80 गुना अधिक बढ़ी है। यह भी सच है कि शराब की बिक्री से सरकार को एक बड़े राजस्व की प्राप्ति होती है। मगर इस प्रकार की आय से हमारा सामाजिक ढांचा क्षत- विक्षत हो रहा है और परिवार के परिवार खत्म होते जा रहे हैं। हम विनाश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

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