पाकिस्तान में महंगाई का तांडव: डीजल ₹520 और पेट्रोल ₹458 के पार

लाहौर,एजेंसी। पाकिस्तान में 3 अप्रैल को ईंधन की कीमतों में हुई यह वृद्धि देश के इतिहास की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बढ़ोतरी है। ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध (West Asia War) और वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधाओं के कारण पाकिस्तान सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।ईंधन की कीमतों में इस "विस्फोट" के पीछे मुख्य कारण ईरान-इजरायल युद्ध है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है।

 युद्ध के कारण इस प्रमुख समुद्री मार्ग से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। पाकिस्तान अपनी जरूरत का अधिकांश तेल सऊदी अरब और यूएई से इसी रास्ते से मंगाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 0-0 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। पाकिस्तान के आर्थिक सलाहकार खुर्रम शहजाद के अनुसार, पिछले महीने खपत में 13% की वृद्धि देखी गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए कीमतें बढ़ाना अनिवार्य हो गया था।

ईंधन का प्रकार          पुरानी कीमत (PKR)    नई कीमत (PKR)   कुल वृद्धि (PKR)     प्रतिशत वृद्धि

हाई-स्पीड डीजल (HSD) 335.86                                520.35        184.49                        55%

पेट्रोल (Motor Spirit) 321.17                               458.41         137.23                          43%

मिट्टी का तेल (Kerosene) 423.72                               457.80          34.08

सरकार का पक्ष और आर्थिक मजबूरी

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक और वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे एक "कठिन लेकिन आवश्यक निर्णय" बताया।

 सरकार अब तक ₹129 अरब की सब्सिडी दे चुकी थी, जिसे आगे जारी रखना राजकोषीय अनुशासन के लिए असंभव था।सरकार ने पेट्रोल पर लेवी ₹105 से बढ़ाकर ₹160 कर दी है, जबकि डीजल पर राहत देने के लिए लेवी को ₹55 से घटाकर शून्य कर दिया है।

 आम जनता के लिए 'लक्षित राहत' 

महंगाई के इस दौर में सरकार ने कुछ राहत उपायों की घोषणा भी की है। मोटरसाइकिल मालिकों को प्रति माह 20 लीटर पेट्रोल पर ₹100 प्रति लीटर की सब्सिडी दी जाएगी।इंटरसिटी बस सेवाओं और कृषि क्षेत्र के लिए विशेष रियायतों की घोषणा की गई है ताकि खाद्य सामग्री की कीमतों पर सीधा असर कम हो।

भविष्य की चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से पाकिस्तान में महंगाई की दर (Inflation) 40% के पार जा सकती है। परिवहन की लागत बढ़ने से दूध, सब्जी और राशन जैसी बुनियादी चीजें भी महंगी होने की आशंका है।

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