"बाजार में दवा 50 और 500 रुपये के अंतर से मिल रही है-लक्ष्मीकांत वाजपेयी

मेरठ । राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने राज्यसभा में शून्यकाल में एक ही तरह की दवाइयों की कीमतों में असमानता को लेकर एक समान एमआरपी लागू करने की मांग उठाई है। इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार के आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पताल इलाज करते हैं, लेकिन मरीजों के लिए जन औषधि केंद्रों की सस्ती दवाइयों के बजाए महंगी दवाइयों का बिल लगाकर इस योजना का दुरुपयोग कर मनमानी करते हैं।

उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब, उनके इलाज और उनके जीवन से जुड़ा विषय है, जिस पर सरकार को इस दिशा में कारगर कदम उठाने की जरूरत है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना और जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से गरीब परिवार के लोगों को सस्ती दरों पर दवा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया था और लागू भी हुआ था।योजना का लाभ भी बड़े पैमाने पर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह विषय बेहद ही गंभीर है।

उन्होंने कहा कि आज की तारीख में स्थिति यह है कि बाजार में एक ही साॅल्ट की दवा 50 रुपये और 500 रुपये के अंतर से मिल रही है, जो कि आम आदमी का सीधे तौर पर आर्थिक शोषण है। उन्होंने कहा कि ऐसा नियमन की कमी की वजह से हो रहा है।

उन्होंने कहा कि दवाइयों के साॅल्ट जब एक हैं, तब एक ही साॅल्ट की एक दवा की गोली की कीमत 10 रुपये और एक गोली की कीमत 50 रुपये क्यों है? उन्होंने कहा कि काम साॅल्ट करता है, कीमत नहीं करती। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग को इस दिशा में कारगर कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि एमआरपी निर्धारित करने की आवश्यकता है।साथ ही 30 सांसदों के समर्थन पत्र भी अपने द्वारा उठाई गई मांग के समर्थन में उन्होंने प्रस्तुत करते हुए मांग पत्र के रूप में सौंपे।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के अंतर्गत नर्सिंग होम में इलाज कराने के लिये जो लोग जाते हैं, वहां के चिकित्सक ब्रांडेड दवाई लिखकर और उसमें आयुष्मान योजना की जो राशि है, उसमें से पलीता लगाने का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि दवाओं के एक ही साॅल्ट की कीमत एक की जाए। कंपनियों की मनमानी पर पूर्णविराम लगे और मरीज को उचित कीमत पर दवा मिले। इसके लिये सरकार के पास अधिकार भी है।उन्होंने अपनी बात के समर्थन में कई तर्क भी दिए।

राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने 30 संसद के सदस्यों का समर्थन पत्र भी अपनी इस मांग के समर्थन के समर्थन में सौंपा है।जिन 30 संसद सदस्यों ने अपना समर्थन उनको दिया है, उनमें गोविन्दभाई, लालजी भाई ढोलकिया गुजरात से, गीता अल्लास चंद्रप्रभा यूपी, बंशीलाल गुर्जर मध्य प्रदेश से, सांसद संजय सेठ यूपी, सुभाष बराला हरियाणा, सतपाल शर्मा जम्मू कश्मीर से, सदानंद म्हालू शेट तांवड़े गोवा, नरेश बंसल उत्तराखंड, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी मध्यप्रदेश से, रेखा शर्मा हरियाणा, महाराजा सनजाओबा लीशेंबा मणिपुर से, दर्शना सिंह यूपी से, धनंजय भीमराव महाडिक महाराष्ट्र से, तेजवीर सिंह यूपी से, राजेंद्र गहलोत राजस्थान से, बाबूराम निषाद यूपी से, संगीता यादव यूपी से, देवेन्द्र प्रताप सिंह छत्तीसगढ़ से, प्रदीप कुमार वर्मा झारखंड से डॉ. भीम सिंह बिहार से, डॉ. सस्मित पात्रा ओडिशा, नारायण दास गुप्ता दिल्ली क्षेत्र, रयगा कृष्णलाह आंध्र प्रदेश से, रवि चंद्र वद्दीराजू तेलंगाना से, एस. सेल्वगनबथी पुद्दुचेरी से, भागवत कराड महाराष्ट्र से, मयंककुमार नायक गुजरात से, सिकंदर कुमार हिमाचल प्रदेश से, संत बलबीर सिंह पंजाब से, दोरजी शेरिंग लेप्चा सिक्किम से सांसद हैं।

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