सेंट्रल मार्केट के सेक्टर-2 में महिलाओं का विरोध

आवास विकास की टीम ने नोटिस चस्पा की, लोगों ने फाड़कर फेंका

 एसपी सिटी के समझाने के बाद महिलाओं ने जारी रखा हंगामा 

 मेरठ।  शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट के सेक्टर-2 में गुरुवार से नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई शुरू की गई। आवास विकास की टीम नोटिस चस्पा करने पहुंची तो स्थानीय महिलाओं ने टीम का फिर से विरोध किया और नोटिस नहीं लगने दिया।हंगामे को देख मौके पर सीओ सिविल लाइन सुचिता सिंह और नौचंदी थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। लोगों को समझने का प्रयास किया। वहीं महिलाओं का कहना है कि किसी भी कीमत पर वह अपने प्रतिष्ठानों पर नोटिस नहीं लगने देंगी। लोगों ने लगाए गए नोटिस को फाड़ दिया है।एसपी सिटी के समझाने का महिलाओं पर कोई असर नहीं हुआ । 

 महिलाओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन के नाम पर उनको धोखा दिया है। महिलाओं की मुख्य रूप से यही मांग है कि उनके मकान 35 से 40 मीटर में बने हुए हैं। ऐसे में यदि वह 1 मीटर सेटबैक छोड़ देंगी तो उन पर रहने का संकट आ जाएगा।इसलिए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि ना ही वह इस नोटिस को कुछ समझते हैं और ना ही अब वह सेटबैक छोड़ेंगी। इसके साथ-साथ जो धरना 15 दिन चलने के बाद सांसद अरुण गोविंद ने आश्वासन देकर खत्म कराया, वह धोखा देना है। मौके की नजाकत को देखते हुए आवास विकास की टीम वापस लौट गयी।  बाद में महिलाओं के बीच पहुंचे एसपी सिटी ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान महिलाए दो गुटो में बटती नजर आयी। 

विरोध के चलते आवास विकास की टीम लौट गई

विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले के समझाने के बाद भी महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। वहीं लगातार विरोध के चलते आवास विकास की टीम फिलहाल सेक्टर-2 से वापस लौट गई है। इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है और पुलिस हालात पर नजर बनाए हुए है।

सपी सिटी महिलाओं को समझाने के लिए पहुंचे

बढ़ते हंगामे को देखते हुए एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठी महिलाओं को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि प्रदर्शनकारी महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी हुई हैं, जिसके चलते मौके पर पुलिस बल तैनात है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।



विरोध के बावजूद टीम नोटिस चस्पा कर रही

सेक्टर-2 में महिलाओं के विरोध के बावजूद आवास विकास की कार्रवाई लगातार जारी है। गुरुवार को भारी विरोध और हंगामे के बीच भी विभाग की कई टीमें मौके पर मौजूद रहकर नोटिस चस्पा करने का काम करती रहीं। स्थानीय लोगों के विरोध के चलते माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते कार्रवाई रुक नहीं रही और लगातार आगे बढ़ाई जा रही है।

प्रदर्शन कर रही एक महिला की तबीयत बिगड़ी

विरोध प्रदर्शन के बीच एक महिला मीनू की अचानक तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं ने तुरंत उन्हें संभाला। घटना के बाद कुछ देर के लिए माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया, जबकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे रहे।

महिलाएं बोलीं- झूठा आश्वासन मिला

धरने पर बैठी महिलाओं ने आरोप लगाया कि बंगाल चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के नाम पर सरकार ने उन्हें झूठा आश्वासन दिया था और अब उनके साथ धोखा किया जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि वे दोबारा धरने पर बैठ गई हैं और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि किसी भी हालत में वे अपने प्रतिष्ठानों पर नोटिस नहीं लगने देंगी।

नोटिस को लोगों ने फाड़ दिया

सेक्टर-2 में विवाद और गहरा गया है। गुरुवार को आवास विकास द्वारा चस्पा किए गए नोटिसों को स्थानीय लोगों ने फाड़ना शुरू कर दिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन के नाम पर उन्हें गुमराह किया है और अब जब कार्रवाई शुरू हुई है तो उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। मौके पर पुलिस बल तैनात है और अधिकारियों द्वारा लोगों को शांत कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

क्या था आदेश 

बीती 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवास विकास को आदेश दिया गया था कि सेंट्रल मार्केट के क्षेत्र की 44 संपत्तियों को सील कर उसकी रिपोर्ट पेश की जाए इसके बाद 8 अप्रैल को आवास विकास द्वारा कार्रवाई करते हुए सभी 44 संपत्तियां सील कर दी गई जिसकी रिपोर्ट 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में पेश भी की गई इसके बाद हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 2 महीने के अंदर सभी 859 आवासीय संपत्तियों में चल रही कमर्शल गतिविधियां तो बंद कराई ही जाएं साथ ही आवासीय के लिए भी सेटबैक छोड़ जाए। जिसके चलते अब वहां रहने वाले लोगों को अपने मकान भी तोड़ने पड़ेंगे इसी का विरोध करते हुए सेक्टर 2 में 15 दिन धरना भी चला।

14 लाख के चंदे पर भी विवाद

इस पूरे आंदोलन के बीच एक और विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों से करीब 14 लाख रुपये का चंदा जुटाया गया अब इस रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया जा रहा है। पूरे प्रकरण को लेकर व्यापारियों द्वारा बनाए गए एक व्हाट्सएप ग्रुप्स में व्यापारी इस पर नाराजगी जता रहे हैं और कुछ “सफेदपोश” लोगों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। सेंट्रल मार्केट सीलिंग प्रकरण अब सिर्फ अतिक्रमण या नियमों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता, प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। फिलहाल व्यापारियों को राहत के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला है।

 विकास विकास के उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इन संपत्तियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। नोटिस तैयार हो रहे हैं, जिनका जल्द वितरण शुरु हो जाएगा। इसके बाद केवल 15 दिन का समय संपत्ति स्वामी को मिलेगा। 16वें दिन से आवास एवं विकास परिषद कार्रवाई करेगा।

 क्या था मामला 

साल-1990 की बात है। मेरठ में आवास-विकास को सूचना मिली कि आवासीय भूखंड पर कॉम्प्लेक्स का निर्माण सेंट्रल मार्केट में किया जा रहा है। अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार भूखंड संख्या 661/6 पर पहुंचे। उन्होंने लेंटर कार्य रुकवाने का प्रयास किया। इस पर स्थानीय व्यापारियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि व्यापारियों ने अधीक्षण अभियंता को थप्पड़ मार दिया। इस मामले में नौचंदी थाने में FIR दर्ज हुई। इसके बाद आवास विकास ने कई बार अवैध कॉम्प्लेक्स को गिराना चाहा, लेकिन कुछ न कुछ अड़चन आ गई।ऐसे में आवास-विकास ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की। साल-2014 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 2 महीने में ये अवैध इमारत गिराई जाए। व्यापारियों ने इस आदेश को चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।करीब 10 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर, 2025 को कॉम्प्लेक्स नंबर 661/6 सहित सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया। 25 अक्टूबर, 2025 को 22 दुकानों वाले इस कॉम्प्लेक्स को ढहा दिया गया था।

सेट बैक की शर्तें 

सेंट्रल मार्किट में पिछले काफी समय से सेट बैक को लेकर भ्रम की स्थिति है। यह साबित करने का प्रयास हो रहा है कि 60 मीटर तक के आवास के लिए सेट बैक जरूरी नहीं है। जबकि विभागीय सूत्रों की मानें तो नियम सब के लिए बराबर हैं। सेट बैक नहीं छोड़ा तो छोटे आवासों पर भी कार्रवाई होना तय है।

 ये है सेट बैक का गणित 

फ्रंट सेटबैक (F): घर के सामने, सड़क और भवन के बीच की दूरी (सामने की तरफ)।

रियर सेटबैक (R): घर के पीछे, प्लॉट की पिछली सीमा और भवन के बीच की दूरी।

साइड सेटबैक (S1): घर के दाएं और बाएं किनारों पर, पड़ोसी प्लॉट की सीमा और भवन के बीच की दूरी।

स्ट्रीट सेटबैक (S2): कॉर्नर प्लॉट के मामले में, मुख्य सड़क के अतिरिक्त दूसरी सड़क की ओर की जगह।

सेंट्रल मार्किट के आवास पर सेटबैक

रेजीडेंशियल 150 वर्ग मीटर तक फ्रंट सेटबैक 1 मीटर, रियर सेटबैक शून्य, साइड सेटबैक शून्य, स्ट्रीट सेटबैक शून्य।

रेजीडेंशियल 151 वर्ग मीटर से 300 वर्ग मीटर तक फ्रंट सेटबैक 3 मीटर, रियर सेटबैक 1.5 मीटर, साइड सेटबैक शून्य, स्ट्रीट सेटबैक शून्य।

रेजीडेंशियल 300 वर्ग मीटर से 500 वर्ग मीटर तक फ्रंट सेटबैक 3 मीटर, रियर सेटबैक 3 मीटर, साइड सेटबैक शून्य, स्ट्रीट सेटबैक शून्य।

कमर्शियल के लिए सेटबैक

कमर्शियल 100 वर्ग मीटर तक फ्रंट सेटबैक 1.5 मीटर, रियर सेटबैक शून्य, साइड सेटबैक शून्य, स्ट्रीट सेटबैक शून्य।

कमर्शियल 101 वर्ग मीटर से 300 वर्ग मीटर तक फ्रंट सेटबैक 3 मीटर, रियर सेटबैक शून्य, साइड सेटबैक शून्य, स्ट्रीट सेटबैक शून्य।

कमर्शियल 301 वर्ग मीटर से 1000 वर्ग मीटर तक फ्रंट सेटबैक 4.5 मीटर, रियर सेटबैक 3 मीटर, साइड सेटबैक शून्य, स्ट्रीट सेटबैक शून्य।


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