पंडित को अवसरवादी कहने के मामले की हो जांच- सुनील भराला
दोषी अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ सीएम से कार्रवाई की मांग की
मेरठ।उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा 2026 के पहले दिन पेपर में पूछे गए अवसरवादिता के प्रश्न और उत्तर में लिखे पंडित शब्द पर ब्राहणों का विरोध बढ़ता जा रहा है। मेरठ से राष्ट्रीय परशुराम परिषद् के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री से जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकरियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
पंडित सुनील भराला ने एक वीडियो जारी करते हुए इस पूरी घटना का विरोध किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ इस पूरे मामले की जांच कराएं। जिस अफसर, कर्मचारी ने परीक्षा के पेपर में ये प्रश्न शामिल किया और उत्तर में पंडित शब्द लिखा है उसके खिलाफ एक्शन लिया जाए। सुनील भराला का कहना है कि ऐसे अफसर, कर्मचारी देश में ब्राहणों और भाजपा, सरकार के खिलाफ षड़यंत्र कर खिलाफ माहौल तैयार कर रहे हैं।
वीडियो में सुनील भराला ने ये कहा यूपी पुलिस दरोगा की परीक्षा संपन्न हो रहा है। जिसमें एक सवाल में पंडित और अवसरवादिता जैसे शब्दों को लिखा गया। ऐसे निकृष्ट शब्दों से स्पष्ट रूप से अफसरों की मानसिकता उजागर हो रही है। जो सरकार को और भाजपा को कटघरे में खड़ा करके एक अभद्र टिप्पणी अंकित करा रहे हैं। इससे साफ पता चल रहा है कि ऐसे लोग ब्राहणों के खिलाफ एक माहौल बनाना चाहते हैं। इन्होंने जो अभद्र टिप्पणी अंकित की है इससे साफ पता चल रहा है कि ब्राहमणों के खिलाफ कड़ा षड़यंत्र चल रहा है।ऐसे अफसर, कर्मचारी जिन्होंने ये प्रश्नपत्र बनाया ये प्रश्न बनाया उनके खिलाफ सीएम योगी कठोर कार्यवाही करें।
भारतीय परंपरा में ज्ञान का प्रतीक है पंडित शब्द
पंडित शब्द भारतीय परंपरा में ज्ञान, विद्वता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे सम्मानजनक शब्द को किसी नकारात्मक या अपमानजनक संदर्भ में प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न या विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना अत्यंत आपत्तिजनक है। यह केवल एक शब्द का मामला नहीं, बल्कि समाज के एक सम्मानित वर्ग की गरिमा से जुड़ा विषय है।इस प्रकार की लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कृत्य को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे प्रकरण की तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा में ऐसी असंवेदनशीलता दोहराई न जाए।


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