हालात-ए-नजर

सिलेंडर का डर

- ललिता जोशी
क्षिति पावक जल गगन समीरा ।
पंच रचित अति अधम शरीरा ॥
यह शरीर इन पंच तत्वों से मिलकर बनती है और इन्हीं पंच तत्वों में ही विलीन हो जाती है । पंच तत्वों का मानव शरीर को चलाने में बहुत ही महत्वपूर्ण है । शरीर के लिए भोजन अत्यंत आवश्यक है । मनुष्य का भोजन कच्चा भी और ये उसे पका कर भी खाता है । पशुओं का अच्छा है उनका तो भोजन कच्चा ही होता है । मनुष्य के सानिध्य में रहने वाले पालतू पशु भी अब मनुष्य की तरह ही कच्चा और पका हुआ भोजन खाते हैं ।

आजकल इज़राइल और ईरान के युद्ध के कारण पेट्रोल और उससे संबन्धित उत्पादों का संकट उत्पन्न हो रहा है । अब तो ये संकट गहराता जा रहा है । जहां देखो वहाँ पर सिर पर खाली सिलेंडर उठाए लोग इधर से उधर घूम रहे हैं ताकि वो भरा हुआ सिलेंडर अपने घर ले जा सकें और अपने परिजनों को खाना पकाकर खिला सकें । एक दो दिन या कुछ माह तक तो फल सब्जी का सेवन कर सकते हैं लेकिन बच्चों और बुजुर्गों को ऐसा भोजन नहीं खिलाया जा सकता ।
इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है । ये युद्ध यूं ही चलता रहा तो अग्नि के और विकल्प ढूंढने पड़ेंगे ।सिलेंडर के बदले इंडक्शन प्लेट का चलन भी बढ़ रहा है । ये जरूरी तो नहीं देश के कोने -कोने में बिजली की सप्लाई लगातार हो ।  कोरोना के बाद ये दूसरी आपदा का सामना कर रहें हम । दोनों ही इन्सानों द्वारा ही उत्पन्न की गई हैं । ये युद्ध अहम का है और असर पड़ गया एलपीजी सिलेंडर पर । लाल रंग का सिलेंडर आजकल सुर्खियों में है। इस सिलेंडर ने पूरे देश को हिला रखा है । इसने तो अब लोकतन्त्र के मंदिर में भी धमाका बोल दिया है । सरकार को इस मुद्दे पर घेर रखा है विपक्ष ने ।
मीडिया चैनलों से लेकर समाचार पत्रों में जितना ये युद्ध छाया हुआ है उतना ही सिलेंडर भी छाया हुआ । लगता है दोनों का चोली -दामन का साथ है। जिधर देखो उधर इसके लिए आखों में जलन और सीने में बैचेनी है । कहीं पूरा परिवार सिलेंडर के चक्कर में यहाँ से वहाँ धक्के खा रहा है । कहीं पर होटल बंद हो गए हैं और कहीं बंद होने के कगार पर है ।इतना ही इस सिलेंडर के कारण कुछ परिवारों ने तो अपने बच्चों के विवाह की तारीख़ भी आगे खिसका दी हैं । गोया ये एलपीजी का सिलेंडर न होकर जीवन की ऑक्सिजन बन गया है । इसी को ध्यान में रखकर अब तो लोगों की भोजन की आदतों में बदलाव आने  लगा है । स्वाद का गुलाम अब इडली और पिज्जा की और आशा भरी निगाहों से देख रहा  है । कम ईंधन में कैसे खाना पकाए जाए इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है । कुछ न कुछ तो रास्ता निकालना ही पड़ेगा ।
विकास के दावे, स्मार्ट सिटी और तेज गति से दौड़ती बुलेट ट्रेन्स सब के सब एक तरफ और दूसरी तरफ सीना ताने खड़ा सिलेंडर सब पर भारी । इस मुए सिलेंडर से सभी भयाक्रांत हैं कि आगे क्या होगा । युद्ध हुआ की नहीं सभी अपने -अपने स्तर पर आपदा में अवसर ढूँढने लग जाते हैं । मुनाफाखोरी और जमाखोरी तो अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच जाती है ।
युद्ध की आग हमेशा से ही आम आदमी को झुलसाती  है । ये वही आम आदमी है जिसके कंधों पर सरकार बनाने का भार होता है । मगर इस आम आदमी की परवाह किसे है ? कभी सब्जियों के ऊंचे दामों की मार खाते हैं आम आदमी । कभी प्याज के लिए आँसू बहाता है आदमी ,कभी लाल -लाल टमाटरों की कीमत से त्रस्त होता है आदमी और कभी दाल में ज्यादा पानी डालना पड़ जाता है पापी पेट को भरना जो है । अब तेल की आग में झुलस रहा है आदमी । इसकी तपिश भी सबसे पहले आम आदमी को ही जला रही है । डर के साये भी आम आदमी पर । मजे की बात है कि अब ये लाल -लाल सिलेंडर कि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस के चक्कर में लिक्विड की तरह इधर से उधर बह रहा है ये आम आदमी । सिलेंडर ने सोना और चाँदी के बेलगाम दामों और गिरते हुए सेंसेक्स को भी पीछे छोड़ समाचारों  में अपना प्रभुत्व जमा लिया है।
जनाब सिलेंडर ने सभी को मिर्ची लगा रखी है । सरकार सफाई दे रही है विपक्ष सवालों दाग रहा है और सिलेंडर लोगों के सिर पर है ।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)

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