निगाहें हाई कोर्ट पर, सुनवाई कल
- मनसबिया के संचालन को लेकर जारी उथल पुथल पर कल लग सकता है विराम
- लखनऊ के बाद उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी है मेरठ की वक्फ मनसबिया
मेरठ। रेलवे रोड स्थित वक्फ मनसबिया की मुतावल्लिशिप को लेकर ज़ोर आज़माईशों का दौर जारी है। इस मामले में हाई कोर्ट बुधवार (आज) को सुनवाई करेगा। कुछ लोग बुधवार को ही कोर्ट के फैसले की उम्मीद भी लगाए बैठे हैं।
बता दें कि यह केस हाई कोर्ट की एक सिंगल बेंच में फ्रेश केस के रूप में दर्ज है। मनसबिया से जुड़े लोगों की निगाहें बुधवार को हाई कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी रहेंगी। पूर्व मुतवल्ली पक्ष का दावा है कि सभी 'संभावनाएं' हमारे साथ हैं, क्योंकि यह वक्फ अलल औलाद है। उधर हाई कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई को देखते हुए पूर्व मुतवल्ली दानिश जाफरी खुद मंगलवार को प्रयागराज के लिए रवाना हो गए। उल्लेखनीय है कि मेरठ की वक्फ मनसबिया लखनऊ के बाद उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा वक्फ है, जिसके चलते यहां का सरताज बनने के लिए शह और मात का खेल चलता रहता है। बता दें कि मेरठ की वक्फ मनसबिया को फिलहाल उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपने अंडर में लेकर यहां लखनऊ के ज़फ़र सज्जाद को प्रशासक और मेरठ के बाकर ज़ैदी को कंट्रोलर नियुक्त कर रखा है और इस मामले को भी पूर्व मुतवल्ली पक्ष कोर्ट में चैलेंज करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल पूर्व मुतवल्ली पक्ष का दावा इसलिए भी मज़बूत माना जा रहा है क्योंकि मनसब अली खां के वक़्फ़नामे में लिखी गई वसीयत के अनुसार वक़्फ़ मनसबिया के संचालन के लिए मनसब अली खां के पारिवारिक सदस्यों को ही प्रमोट किया गया है। पूर्व मुतवल्ली पक्ष ने हाई कोर्ट में भी इसी पक्ष को मजबूती के साथ रखा है।


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