वैश्विक चुनौतियों में ​राष्ट्रीय एकता और जन-अनुशासन प्रथम उत्तरदायित्व 

सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

​वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मध्य-पूर्व के देशों में जारी संघर्ष ने न केवल भू-राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया है, बल्कि संपूर्ण विश्व की आपूर्ति श्रृंखलाओं और आर्थिक गतिशीलता को भी गहरे दबाव में डाल दिया है। देखा जाए तो इस चुनौतीपूर्ण समय में भारत की भूमिका अत्यंत संयमित और रणनीतिक रही है। एक सशक्त राष्ट्र के रूप में, भारत ने न केवल अपनी तटस्थ विदेश नीति का परिचय दिया है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए सक्रिय कूटनीति का पालन किया है। विषम परिस्थितियों में भी भारत ने किसी से संबंध नहीं बिगाड़े है, ईराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने भारत को एक सच्चा मित्र देश बताते हुए द्विपक्षीय संबंधों की प्रगाढ़ता को रेखांकित भी किया है। जो इस संकट के दौर में हमारी कूटनीतिक सफलता का प्रमाण है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से निभा रहा है। हाल ही में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा मिशन के तहत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले और भारत आने वाले तेल, एलपीजी और एलएनजी जहाजों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। इस रणनीतिक मिशन के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य के चुनौतीपूर्ण मार्गों से भारत आने वाले टैंकरों को सुरक्षित एस्कॉर्ट (मार्गदर्शन) प्रदान किया जा रहा है। इस ऑपरेशन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलपीजी और कच्चे तेल से लदे महत्वपूर्ण जहाज, जिनमें पाइन गैस और जग वसंत जैसे पोत प्रमुख हैं, नौसेना की सुरक्षा में सुरक्षित मार्ग पार कर चुके हैं। इनके अतिरिक्त शिवालिक, नंदा देवी और कच्चे तेल के टैंकर जग लाड़की सहित अन्य 20 महत्वपूर्ण जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट प्रदान कर अरब सागर की ओर निकाला गया है, ताकि भारत में ईंधन की आपूर्ति बाधित नहीं हो।

लेकिन, इन सबके बीच ​दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि सरकार की इन दूरदर्शी नीतियों और नौसेना के साहसी प्रयासों के बीच भी देश के भीतर का तबका ही अविश्वास और अनुशासनहीनता का परिचय दे रहा है। जब सरकार ने स्पष्ट रूप से ऐसी कोई घोषणा नहीं की है कि तेल या गैस की कोई कमी होने वाली है, तब भी समाज में घबराहट के चलते पैनिक बाइंग और अनावश्यक स्टॉक करने की होड़ मचा दी है। देश के विपक्ष और उनके समर्थकों द्वारा अफवाह का बाजार गरम होने से जनता गैस की टंकी, पेट्रोल का स्टाॅक करकर देश में स्वयं की अधीरता, अविश्वास और अनुशासनहीनता का जो परिचय दे रही हैं जो पूर्णतः अनुचित कदम है।

गैस सिलेंडरों और पेट्रोल का व्यर्थ संचय केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि यह बाजार में एक तरह की कृत्रिम कमी को जन्म देगा। कालाबाजारी और पैनिक बाइंग की यह प्रवृत्ति समाज में ऐसी अस्थिरता पैदा करती है, जो अंततः उन लोगों के लिए संकट बनेगी, जिन्हें वास्तव में उन संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है। ऐसी गतिविधियां न केवल हमारे आर्थिक तंत्र को कमजोर करती हैं, बल्कि उन ताकतों के लिए भी अवसर प्रदान करती हैं जो भारत की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित करना चाहती हैं।

​जब हम कोविड-19 जैसी अभूतपूर्व महामारी का सामना कर रहे थे, तब भारत ने दुनिया को एकजुटता और अनुशासन का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय जिस टीम इंडिया की अवधारणा का आह्वान किया था, उसका मूल अर्थ किसी भी विपत्ति में धैर्य बनाए रखना और एक-दूसरे का संबल बनना था। लेकिन आज इस बात के अर्थ को अनर्थ के रूप में लिया जा रहा है। आज जब देश के सामने वैश्विक ऊर्जा संकट की आहट है, तब हमें उसी संयम की पुनरावृत्ति की आवश्यकता है। यह समय अफवाहों के बाजार में लिप्त होने का नहीं, बल्कि आधिकारिक सूचनाओं और सरकार की नीतियों पर पूर्ण विश्वास जताने का है। जब सरकार राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए प्रयासरत है, तब आम नागरिक का यह प्राथमिक कर्तव्य बन जाता है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें।

​इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि संकट के समय में जिस राष्ट्र की जनता ने अनुशासन का परिचय दिया है, वही विजेता हुए है। किसी भी लोकतंत्र की सुदृढ़ता केवल सरकार की नीतियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस विश्वास पर भी टिकी होती है जो नागरिक अपनी व्यवस्था में रखते हैं। पेट्रोल और गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं का बेवजह भंडारण करना एक जागरूक नागरिक के चरित्र के विपरीत है। हमें यह स्मरण रखना होगा कि जब कभी भारत पर संकट के बादल मंडराए हैं, तब एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई रणनीतिक नीतियां और नौसेना का यह 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा', देश के लिए एक सुरक्षा कवच का निर्माण कर रहे हैं। इन प्रयासों को सफल बनाने में नागरिक सहयोग एक अनिवार्य घटक है।



​अंत में यह काल खंड धैर्य और राष्ट्रीय निष्ठा की परीक्षा का समय है। अफवाहों को बल देकर समाज में अस्थिरता पैदा करना राष्ट्र की प्रगति में बाधक है। हमें एक ऐसे समाज के रूप में कार्य करना होगा जो सूचनाओं की सत्यता की जांच करे और किसी भी उकसावे में आए बिना धैर्यपूर्वक स्थिति का अवलोकन करे। राष्ट्र की निष्ठा का असली प्रमाण प्रतिकूल परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रियाओं में निहित होता है। आइए, हम सब मिलकर एक अनुशासित और जागरूक समाज के रूप में अपनी नैतिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करें और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चल रही इन कूटनीतिक, आर्थिक और सामरिक पहलों को सफल बनाने के लिए विश्वास का वातावरण बनाए रखें। भारत की अखंडता और आर्थिक मजबूती का मार्ग हमारे सामूहिक अनुशासन से ही प्रशस्त होता है।



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