नोएडा क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर पर पत्नी ने लगाए सनसनीखेज आरोप

 दुष्कर्म, मारपीट और जबरन गर्भपात का मुकदमा दर्ज; जांच शुरू

मेरठ/नोएडा। उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सीनियर अधिकारी पर उनकी ही पत्नी ने बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। वर्तमान में नोएडा क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर सुनील दत्त के खिलाफ मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में दुष्कर्म, मारपीट और जबरन गर्भपात कराने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। खाकी को शर्मसार करने वाले इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

2007 में हुई थी शादी, अब टूटी मर्यादा की दीवार

पीड़िता, जो मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र की निवासी है, ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसका विवाह वर्ष 2007 में सुनील दत्त के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट आने लगी। पत्नी का आरोप है कि इंस्पेक्टर सुनील दत्त उसके साथ अक्सर मारपीट करते थे और जबरन शारीरिक संबंध बनाते थे।

जबरन गर्भपात और अंधविश्वास के आरोप

तहरीर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, आरोपी इंस्पेक्टर ने पीड़िता की मर्जी के बिना उसका गर्भपात भी कराया। इतना ही नहीं, पत्नी ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उसका पति अंधविश्वास में अत्यधिक भरोसा रखता है। इसी अंधविश्वास के चलते वह घर में अजीबोगरीब कृत्य करता था और पत्नी पर भी इसका दबाव बनाता था, जिसका विरोध करने पर उसे प्रताड़ित किया जाता था।

पुलिसिया कार्रवाई और मुकदमा

मामले की गंभीरता और पीड़िता के प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर मेरठ पुलिस ने आरोपी इंस्पेक्टर सुनील दत्त के विरुद्ध दुष्कर्म (376), मारपीट और जबरन गर्भपात समेत आईपीसी की विभिन्न संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। चूंकि मामला एक कार्यरत पुलिस अधिकारी से जुड़ा है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल इंस्पेक्टर सुनील दत्त नोएडा क्राइम ब्रांच में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मेरठ पुलिस अब पीड़िता के बयान दर्ज करने और मेडिकल साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया में है। सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी इंस्पेक्टर के निलंबन की संस्तुति भी की जा सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर वर्दीधारियों के निजी आचरण और घरेलू हिंसा के मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि कानून का रक्षक कहे जाने वाले अधिकारी पर लगे इन आरोपों में कितनी सच्चाई निकलती है।

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