प्रोजेक्ट फीस को लेकर सीसीएसयू में हंगामा
छात्र नेताओं ने कहा- जबरन डाला जा रहा छात्रों पर आर्थिक बोझ
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों के प्रोजेक्ट शुल्क को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को छात्र नेता विनीत चपराना और अंकित अधाना के नेतृत्व में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार हंगामा किया और कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला तथा वित्त अधिकारी रमेश चंद्र का घेराव कर ज्ञापन सौंपा।
छात्रों का आरोप है कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्नातक छठे सेमेस्टर में माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट के नाम पर 1390 रुपये और परास्नातक स्तर पर 1590 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है, जो वर्तमान व्यवस्था के हिसाब से अनुचित है। उन्होंने कहा कि जब यह शुल्क निर्धारित किया गया था, तब बाह्य परीक्षकों द्वारा मूल्यांकन का प्रावधान था।लेकिन पिछले कई वर्षों से प्रोजेक्ट का मूल्यांकन महाविद्यालयों के आंतरिक शिक्षकों द्वारा ही सामान्य प्रैक्टिकल की तरह किया जा रहा है और बाहरी परीक्षक की नियुक्ति नहीं हो रही है। ऐसे में इतनी अधिक फीस वसूली को छात्रों ने आर्थिक शोषण बताया है।
छात्रों पर डाला जा रहा जबरन दबाव
छात्र नेता विनीत चपराना ने आरोप लगाया कि यह शुल्क छात्रों पर जबरन डाला जा रहा है और इसे जजिया कर के समान बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय, जैसे मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय, पहले ही इस तरह की फीस में कटौती कर चुके हैं, जबकि विवि में अभी तक कोई राहत नहीं दी गई है।
छात्रों ने मांग की है कि यूजी और पीजी दोनों स्तरों पर प्रोजेक्ट फीस को घटाकर सामान्य प्रैक्टिकल फीस के बराबर किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर बोझ कम हो सके।विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की शिकायतों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा। छात्र नेताओं का कहना है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो छात्र मजबूर होकर विवि के खिलाफ आंदोलन करेंगे।


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