हरीश की इच्छा मृत्यु पर मेरठ के डॉक्टरों की रिपोर्ट एम्स ने लगाई थी मोहर
मेरठ। देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एतिहासिक फैसला सुनाते हुए निष्क्रय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया )की अनुमति दी थी।32 वर्षीय हरीश राणा की इच्छा मृत्यु देने में मेरठ के मेडिकल कॉलेज के टीम से रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट को सही मानते हुए एम्स ने स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी ।
मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड डा अखिल प्रकाश ने बताया गाजियाबाद सीएमओ डा अखिलेश मोहन ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा आरसीगुप्ता को पत्र लिखते हुए गाजियाबाद के हरीश राणा के परिजनाें के द्वारा इच्छामृत्यु पर जांच करने के टीम का गठन करने के कहा था। जिस पर मेडिकल कॉलेज से एक टीम का गठन किया गया। जिसमें न्यूरो सर्जन डा अखिल प्रकाश, डा सचिन गर्ग प्लास्टिक सर्जन डा अमित श्रीवास्त्व एनेसथीसिया डा अंकित को शामिल किया गया। उन्होंने बताया दिसम्बर माह में टीम ने अस्पताल में हरीश राणा कीजांच पड़ताल की। उन्होंने बताया 13 साल साल पहले हरीश राणा को चोट लगी थी तब उन्हें चंडीगढ़ भर्ती कराया गया था। स्थिति में सुधार न होने पर दिल्ली के कई अस्पताल में भर्ती कराया गया। डा अखिल प्रकाश ने बताया लंबे समय से बिस्तर पर रहने के लिए शरीर की हडियां जाम हो गयी थी। खाने के लिए पेट में नली का सहारा लिया जा रहा था। उन्होंने बताया टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्थिति में सुधार न होने के जानकारी थी। उन्होंने बताया उन्होनें अपनी रिपोर्ट को एम्स में भेज दिया था। एम्स के चिकित्सकों ने रिपोर्ट काे सही बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी। जिसके आधार पर पिछले 13 सालों से मरणासन्न अवस्था में अस्पताल में पडे हरीश राणा को इच्छामृतयु की स्वीकृति प्रदान करने के आदेश दिया।


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