जाट संसद में 'जाट' शब्द हटाने पर हुआ हंगामा
'जाट' उखाड़कर ले गए पुलिस अफसर,पूर्व मंत्री संजीव बालियान और एसडीएम में तीखी नोकझोंक
पंजाब के सीएम भगवंत मान भीड़ के कारण बिना अनावरण लौटे; ,धरने पर बैठे समाज के लोग
मेरठ। जनपद के सकौती स्थित हितकारी इंटर कॉलेज में रविवार को आयोजित 'इंटरनेशनल जाट पार्लियामेंट' में उस समय भारी हंगामा और बवाल खड़ा हो गया, जब महाराजा सूरजमल की नवनिर्वाचित प्रतिमा की फाउंडेशन वॉल (नींव की दीवार) से 'जाट' शब्द हटा दिया गया। इस बात से नाराज जाट समाज के लोग कार्यक्रम खत्म होने के बाद प्रतिमा के पास ही धरने पर बैठ गए और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का आरोप है कि प्रशासन जान-बूझकर उनके महापुरुषों और समाज का अपमान कर रहा है। जाट समाज ने शाम 7 बजे सकौती में पंचायत का ऐलान किया है जिसमे आगे की रणनीति का फैसला लिया जायेगा।
अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक अध्यक्ष रामअवतार पलसानिया ने बताया है कि सरधना में चल रहे कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन के लोग मूर्ति पर लिखे “जाट” शब्द को हटाकर अपने साथ ले गए। इस घटना के बाद संगठन के पदाधिकारियों और समर्थकों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने विरोध स्वरूप धरना शुरू कर दिया।
रामअवतार पलसानिया ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान अचानक सरधना पुलिस प्रशासन के कुछ अधिकारी मौके पर पहुंचे और अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद से संबंधित मूर्ति पर लिखे “जाट” शब्द को निकालकर अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि यह कदम समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक प्रशासन “जाट” शब्द को वापस लाकर उसी मूर्ति पर स्थापित नहीं करता, तब तक उनका धरना लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और प्रशासन से जल्द समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।
भगवंत मान बिना अनावरण लौटे, संजीव बालियान ने किया अनावरण
इससे पहले, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल दोपहर में कार्यक्रम स्थल पहुंचे। भगवंत मान को महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण करना था, लेकिन जैसे ही वह प्रतिमा की ओर बढ़े, हजारों की भीड़ बेकाबू होकर टूट पड़ी। भारी अव्यवस्था के चलते भगवंत मान प्रतिमा तक नहीं पहुंच पाए और बिना अनावरण किए ही मंच पर लौट आए। उनके जाने के बाद, मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद और भाजपा नेता डॉ. संजीव बालियान ने प्रतिमा का अनावरण किया।
रात को हटाया, दिन में टेंपरेरी लगा, फिर हटाया गया 'जाट' शब्द
हंगामे की मुख्य वजह प्रतिमा के नीचे लगी नेमप्लेट थी। ग्रामीणों का कहना है कि शनिवार रात प्रतिमा की फाउंडेशन दीवार पर 'वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल जाट' लिखा गया था, लेकिन रविवार सुबह उसे पुलिस ने रातों-रात हटवा दिया । कार्यक्रम के दौरान जब समाज के लोगों ने विरोध जताया, तो आयोजकों ने आनन-फानन में एक टेंपरेरी (अस्थायी) नेमप्लेट लगवा दी, जिसके बाद संजीव बालियान ने अनावरण किया। लेकिन आरोप है कि जैसे ही भाषण शुरू हुए, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने उस टेंपरेरी प्लेट को दोबारा हटवा दिया। पुलिस अफसरों का कहना था कि मुख्यमंत्री के आदेश है कि जाति सूचक शब्द नहीं लिखे जा सकते।
संजीव बालियान और एसडीएम के बीच तीखी नोकझोंक
हंगामा बढ़ता देख सरधना के एसडीएम उदित नारायण सेंगर मौके पर पहुंचे। पूर्व मंत्री संजीव बालियान ने एसडीएम से तीखे सवाल किए। बालियान ने कहा, "जिस संस्था ने यह प्रतिमा डोनेट की है, उसका नाम ही 'इंटरनेशनल जाट संस्था' है, जो यहां लिखा गया है। यह गांव का आयोजन है और मैं ग्रामीणों की भावनाओं के साथ हूं। आप क्या चाहते हैं, समस्या क्या है?" इस पर एसडीएम ने स्पष्ट किया, "शासन की गाइडलाइंस के अनुसार, प्रतिमाओं के पास कोई भी जातिसूचक शब्द नहीं लिखा जा सकता है, इसलिए इसे नहीं लिखा जाएगा।"
धरने पर बैठे लोग, परमानेंट प्लेट लगाने की मांग पर अड़े
एसडीएम के बयान से नाराज होकर जाट समाज के लोग प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि जब तक प्रतिमा के पास 'जाट' शब्द की नेमप्लेट परमानेंट तौर पर नहीं लगा दी जाती, वे वहां से नहीं उठेंगे। लोगों ने आरोप लगाया कि गेट पर भी 'जाट' लिखा था, जिसे प्रशासन ने पेंट करा दिया।
भगवंत मान का मंच से तंज: "बालियान साहब कान बंद कर लो, मोदी के बारे में बोल रहा हूं"
इससे पहले, पंजाब के सीएम भगवंत मान ने अपने संबोधन में जमकर सियासी तीर चलाए। मंच पर बैठे भाजपा नेता संजीव बालियान की ओर देखते हुए उन्होंने कहा, "बालियान साहब जरा कान बंद कर लीजिए, मैं मोदी जी के बारे में बोल रहा हूं।" इसके बाद उन्होंने पीएम मोदी की डिग्री और इसरो (ISRO) से जुड़े बयानों पर जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि "जिनका आठवीं क्लास का सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा, वे वैज्ञानिक संस्थाओं से नाता जोड़ रहे हैं।" मान ने यह भी कहा कि देश की किस्मत चल रही है और शहीदों ने खून देकर हमें यह वोटरकार्ड दिया है, जिसे पहचानना होगा।
पार्लियामेंट में यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान सहित 5 राज्यों से हजारों लोग पहुंचे। NH-58 पर ट्रैक्टरों का रेला लगा रहा, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। ट्रैक्टरों पर लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए चल रहे थे। जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी ने ऐलान किया कि आने वाले एक से दो सालों में देश के सभी जाट बहुल गांवों में समाज के महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी ताकि युवा पीढ़ी को इतिहास और गौरव से जोड़ा जा सके।
धरने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। वहीं, संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी साफ कर दिया है कि उनकी मांग पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।समाचार लिखे जाते समय मौके पर हंगामा जारी है , जाट संसद के लोग धरने पर बैठे है . पूर्व मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि अब जो गांव वाले फैसला करेंगे, मैं पूरी तरह उसके साथ हूँ , शाम 7 बजे पंचायत में आगे का फैसला लिया जायेगा।
अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक अध्यक्ष रामावतार पलसानिया ने एक बयान जारी करते हुए जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे समूचे समाज का अपमान करार दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि शाम 6 बजे तक प्रशासन ने सम्मानपूर्वक 'जाट' शब्द वापस नहीं लगाया, तो शाम 7 बजे जाट समाज खुद इसे स्थापित कर अपने अपमान का बदला सम्मान के साथ लेगा।
रामावतार पलसानिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आज उत्तर प्रदेश में महाराजा सूरजमल जी की सबसे बड़ी प्रतिमा का अनावरण होना था। प्रतिमा पर बड़े अक्षरों में 'जाट' शब्द लिखा गया था, जिसे मेरठ के पुलिस-प्रशासन ने चलती सभा में चोरी-छिपे हटा दिया। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदू धर्म रक्षक वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल जी का अपमान चौधरी चरण सिंह और बाबा टिकैत की इस पावन धरती पर किया गया है।"
संस्थापक अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मेरठ प्रशासन सम्मान के रूप में फिर से 'जाट' शब्द नहीं लगाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा। उन्होंने जाट समाज से अपील की है कि वे तत्काल प्रभाव से भारी संख्या में सकौती टांडा पहुंचें। पलसानिया ने कहा, "हमने प्रशासन को शाम 6 बजे तक का समय दिया है। यदि वे शब्द वापस नहीं लगाते, तो शाम 7 बजे जाट समाज फिर से 'जाट' शब्द को सम्मानपूर्वक लगाने का निर्णय ले चुका है। जाट कौम और महाराजा सूरजमल जी का अपमान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"


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