बढ़ती महंगाई का खतरा


 राजीव त्यागी 

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब केवल दो देशों का सैन्य टकराव नहीं रह गया है बल्कि यह धीरे धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला संकट बनता जा रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहा यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार व्यापारिक गतिविधियों और वित्तीय बाजारों पर गहरा असर डाल रहा है।

 कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज वृद्धि और शेयर बाजारों में आई गिरावट ने यह संकेत दे दिया है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो इसका असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हर देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में तेजी इस संकट का सबसे बड़ा संकेत बनकर सामने आई है। 

तेल की कीमतों में इतनी तेज वृद्धि का सीधा कारण पश्चिम एशिया में पैदा हुई अनिश्चितता और आपूर्ति बाधित होने की आशंका है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक और निर्यातक क्षेत्रों में से एक है इसलिए वहां होने वाला कोई भी सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार को तुरंत प्रभावित करता है।

 निवेशकों और व्यापारियों को डर है कि यदि युद्ध और फैलता है तो तेल की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है। तेल की कीमतों में इस उछाल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में हर बढ़ोतरी सीधे देश की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करती है।

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