ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले खुद दुकानों को खाली करने लगे दुकानदार
नयी सड़क से लेेकर सैक्टर दो के बाजार दूसरे दिन भी बंद रहे, बाजार बंद कराने केा लेकर दो गुटों में बंटे व्यापारी
मेरठ। जनवरी माह में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सैट्रल मार्केट के अवैध निर्माण पर फैसले को अटल रखते हुए मार्च माह में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद जैसे - जैसे ध्वस्तीकरण की तारीख नजदीक आती जारही है। दुकानदारों ने अपनी दुकानों को या खाली करना आरंभ कर दिया है। वही अवैध निर्माण के दायरे में आयी दुकानों को तोड़ना या शटर हटा कर दीवार लगानी आरंभ कर दी है। शनिवार को भी यही कुछ सैंट्रल मार्केट में देखने को मिला। इस दौरान दूसरे दिन भी बाजार बंद रहे। दुकानों को बंद कराने के लिए व्यापारी दो गुटों में बंटते नजर आए । हालाकि बाद अन्य दुकानदारों ने अपनी दुकानों के शटर को गिरा दिया।
सैंट्रल मार्केट में जहां सुबह होते ही चहल पहल शुरू हो जाती थी। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले ही सेंट्रल मार्केट की रौनक खत्म होनी शुरू हो गई है। जैसे-जैसे ध्वस्तीकरण की तारीख नजदीक आ रही है और व्यापारियों को कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है वैसे ही व्यापारियों की बेचैनी भी अब बढ़ती जा रही है। और दुकानदार खुद अपनी दुकानों को खाली करने के साथ-साथ तोड़ना शुरू कर चुके हैं।व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए बाहर के टीन शेड हटा रहे हैं तो इसी के साथ-साथ दुकानों के शटर हटाकर दीवार भी कर रहे हैं। उनको कहीं ना कहीं उम्मीद है कि अगर दुकान का शटर हटकर गेट लग जाएगा तो वह इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बच जाएंगे हालांकि इस बात की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है के दीवार लगाने पर प्रतिष्ठान बचेंगे।
अब तो कोई चमत्कार ही बचा सकता है
कुछ व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों के बचने की उम्मीद छोड़ भी चुके हैं इसके बाद वह अब अपनी दुकानों का सामान जैसे शर्ट या बाहर सजावट के लिए लगाई गई सीलिंग इत्यादि को उतार कर कबाड़ी को बेचते भी नजर आ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि अब कोई चमत्कार ही हमारे प्रतिष्ठानों को बचा सकता है अन्यथा कोई विकल्प नहीं है।सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए पंचायत की, व्यापारिक बंदी की, इसके साथ-साथ उन्होंने भगवान से भी प्रार्थना करते हुए सुंदरकांड का आयोजन भी किया। उसके बाद भी उन्हें इस कार्रवाई में कोई राहत नहीं मिली आवास विकास निरंतर अपना कार्य कर रहा है और उनके अनुसार निर्धारित समय पर कार्रवाई होगी।
आवास विकास में पहुंच रहे बिना नाम के पत्र
अवैध निर्माण के खिलाफ जहां व्यापारी एक जुट है वही कुछ लोग व्यापारियों से खुश नहीं है ये वो लोग है जिन्के मकान दुकानों के पास है आवास विकास में पिछले दो माह में गुमनाम लेटर पहुंच रहे है। जिसमें किसी का नाम है। सिर्फ मकान दिए गये है।
बोले अधिकारी
इस बारे में उप आवास आयुक्त अनिल कुमार का कहना है कोर्ट के आदेश का विधिवत पालन किया जा रहा है। कोर्ट के बाद 860 लोगों को नोटिस जारी किए गये है। जिसमें दुकाने, नर्सिग होम व पब्लिक स्कूल शामिल है।


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