दुकानों के साथ पब्लिक स्कूलों को ध्वस्तीकरण के नोटिस मिले 

 30 स्कूलों के संचालकों ने उप आवास आयुक्त से लगाई गुहार 

 मेरठ। सैक्ट्रल मार्केट में जहां दुकानों के ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। वही इस जद में पब्लिक स्कूल व बैंक व नर्सिग होम  भी जद आ गये है। शनिवार को तीस स्कूलों के संचालक नोटिस मिलने के बाद आवास विकास अपने स्टाफ के साथ पहुंचे जहां उन्होंने उप आवास आयुक्त से ध्वस्तीकरण से पब्लिक स्कूलों को दूर रखने की गुहार लगाई । लेकिन उप आवास आयुक्त ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सहयोग करने से मना कर दिया। 

 शनविवार दोपहर बाद ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवलजीत सिंह के नेतृत्व में लगभग 25–30 स्कूलों के चेयरमैन, डायरेक्टर्स, प्रिंसिपल्स तथा सैकड़ों स्टाफ सदस्यों ने अपने-अपने स्कूलों की गाड़ियों के साथ आवास विकास परिषद कार्यालय पहुँचकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और परिषद के अधिकारियों को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान स्कूल प्रतिनिधियों ने आवास विकास परिषद द्वारा स्कूलों को भेजे गए ध्वस्तीकरण  संबंधी नोटिसों को पूरी तरह गैरकानूनी, शिक्षा विरोधी और नियमों के विपरीत बताते हुए इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की।

कवलजीत सिंह ने कहा कि स्कूलों को व्यवसायिक गतिविधि के रूप में देखना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है बल्कि यह देश के मौजूदा कानूनों और सरकारी नीतियों के भी विरुद्ध है। भारत के सभी स्कूल ट्रस्ट या सोसाइटी के अंतर्गत संचालित होते हैं, जो कि समाज सेवा और शिक्षा के उद्देश्य से स्थापित किए जाते हैं।



उन्होंने बताया कि ऐसे संस्थानों को आयकर अधिनियम की धारा 12A के अंतर्गत पंजीकरण इसलिए दिया जाता है क्योंकि वे नॉट-फॉर-प्रॉफिट आधार पर संचालित होते हैं और उनका उद्देश्य केवल शिक्षा, समाज सेवा तथा अन्य चैरिटेबल गतिविधियाँ होती हैं। कानून के अनुसार 12A के अंतर्गत पंजीकृत संस्थान किसी भी प्रकार का व्यापारिक लाभ कमाने के उद्देश्य से कार्य नहीं कर सकते।

आगे कहा कि स्कूलों को जो मान्यता दी जाती है वह राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। इस मान्यता की शर्तों में स्पष्ट रूप से उल्लेख होता है कि स्कूल किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित नहीं करेंगे और उनका उद्देश्य केवल शैक्षिक गतिविधियाँ चलाना होगा। जब राज्य सरकार स्वयं मान्यता देते समय यह स्पष्ट करती है कि स्कूल व्यापारिक गतिविधियाँ नहीं करेंगे, तो बाद में उन्हीं स्कूलों को व्यवसायिक संस्था मानना पूरी तरह विरोधाभासी और अनुचित है।

इसके अतिरिक्त स्कूलों के बिजली कनेक्शन भी LMV-4 श्रेणी में दिए जाते हैं, जो विशेष रूप से स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लिए निर्धारित है, जबकि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग LMV-10 श्रेणी होती है। यह भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार स्वयं शिक्षा संस्थानों को व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से अलग श्रेणी में रखती है।

उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त या व्यापारिक गतिविधियाँ संचालित नहीं की जातीं। स्कूलों का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना और समाज के लिए जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।

 कहा कि आरटीई अधिनियम के अंतर्गत सरकार स्वयं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में भेजती है, जहाँ उन्हें निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। इसके अतिरिक्त अनेक स्कूल अपनी ओर से भी गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा, किताबें, यूनिफॉर्म तथा अन्य शैक्षिक सहायता प्रदान करते हैं। यह तथ्य स्पष्ट रूप से सिद्ध करता है कि स्कूल समाज सेवा और शिक्षा के केंद्र हैं, न कि व्यवसायिक गतिविधियों के।

ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन ने आवास विकास परिषद और सरकार से मांग की है कि स्कूलों को भेजे गए ध्वस्तीकरण नोटिसों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और शिक्षा संस्थानों को अनावश्यक प्रशासनिक दबाव से मुक्त किया जाए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थानों के साथ इस प्रकार का व्यवहार जारी रहा तो प्रदेश भर के स्कूलों के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

उप आवास आयुक्त अनिल कुमार ने स्कूलों के संचालकों से कहा कोर्ट के आदेश केआगे बंधे हुए है। कहा कि कोर्ट के साफ आदेश है। 860 जिन अवैध निर्माणेां को ध्वस्तीकरण के आदेश दिए है । उसमें दुकाने,स्कूल, नर्सिग होम, बैंक शामिल है। कार्रवाई एक समान होगी। 


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