कंपनी बाग में बोनसाई प्रदर्शनी में  70 से अधिक प्रजातियों के पौधे प्रदर्शित

 महिला दिवस पर तृतीय वार्षिक बोनसाई प्रदर्शनी आयोजन 

मेरठ।  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वनुली बोनसाई स्टडी ग्रुप द्वारा तृतीय वार्षिक बोनसाई प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. शांति स्वरूप ने किया। प्रदर्शनी में ग्रुप से जुड़े सदस्यों ने अपने आकर्षक और कलात्मक बोनसाई पौधों का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला दिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर की गई। इस दौरान सभी सदस्यों ने एक-दूसरे को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं और महिलाओं की रचनात्मकता व योगदान की सराहना की।प्रदर्शनी में अंजलि गुप्ता, दीप्ति अग्रवाल, मीरा सिंह, मोनिका अग्रवाल, निधि अग्रवाल, डॉ. नलिनी मित्तल, डॉ. पद्मजा मोहन, प्रियंका जैन, सीमा जैन, शैल जैन, संगीता नेहरा, शैलि मोहता, सोनल गोयल, रंजना आनंद, सुप्रिया सोंधी, रितु मांगलिक, तनु अग्रवाल और कनिष्क अत्रेय सहित कई सदस्यों ने भाग लेकर अपने बोनसाई पौधों को प्रदर्शित किया।प्रदर्शनी में लगभग 250 से अधिक बोनसाई पौधे प्रदर्शित किए गए, जिनमें कुछ पौधे 37 वर्ष पुराने भी थे और उनकी ऊंचाई करीब ढाई फीट तक थी।बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बोनसाई कला के बारे में जानकारी प्राप्त की।

डॉ. शांति स्वरूप ने बताया कि बोनसाई एक जापानी कला है, जिसकी मूल उत्पत्ति चीन से मानी जाती है। इसमें पौधों को उनके प्राकृतिक स्वरूप में ही छोटे आकार में विकसित किया जाता है। इसकी ऊंचाई 4 इंच से लेकर 3 से 4 फीट तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि बोनसाई बागवानी और कला का अनूठा संगम है।उन्होंने बताया कि यह आयोजन उनकी व्यक्तिगत रुचि से जुड़ा हुआ है। वनुली बोनसाई स्टडी ग्रुप के माध्यम से वे पूरे वर्ष लोगों को बोनसाई बनाने की कला सिखाते हैं। प्रदर्शनी में उन्हीं विद्यार्थियों ने भाग लिया, जो साल भर इस कला को सीखते हैं और अपने तैयार किए गए पौधों को यहां प्रदर्शित करते हैं।ग्रुप के सदस्य कनिष्क ने बताया की प्रदर्शनी में करीब 70 से अधिक प्रजातियों के बोनसाई पौधे प्रदर्शित किए गए। इनमें मुराया, बोगनविलिया की विभिन्न किस्में, फाइकस की कई प्रजातियां जैसे पीपल और फिल्कन, एडेनियम, फोकेरिया, पोर्टुलाकरिया, काजोरिना समेत कई दुर्लभ प्रजातियां शामिल रहीं। बोलेइस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बोनसाई कला को प्रोत्साहित करना है। साथ ही महिला दिवस के अवसर पर यह संदेश देना भी था कि महिलाएं रचनात्मकता के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

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