मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के छात्रों को नेल्को इंडिया में वैश्विक स्तर की विनिर्माण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव
मेरठ।उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के बीपीईएस (द्वितीय सेमेस्टर) के विद्यार्थियों ने देश की अग्रणी खेल उपकरण निर्माता कंपनी नेल्को इंडिया प्रा. लि. का शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को बड़े स्तर पर खेल सामग्री निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गुणवत्ता मानकों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। वर्ष 1950 में स्थापित (जिसकी जड़ें 1942 से जुड़ी हैं) नेल्को इंडिया लगभग 2,00,000 वर्ग फुट में फैली दो विशाल इकाइयों में संचालित होती है। कंपनी 75 से अधिक देशों में निर्यात करती है तथा वर्ल्ड एथलेटिक्स (पूर्व में IAAF) और IWF प्रमाणित उपकरणों का निर्माण करती है, जिनका उपयोग ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे प्रमुख वैश्विक आयोजनों में किया जाता है।
औद्योगिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने उच्च क्षमता वाली वल्कनाइज़्ड रबर उत्पादन प्रक्रिया (प्रति दिन लगभग छह टन तक), सीएनसी मशीनिंग, हाइड्रोलिक मोल्डिंग प्रेस, थ्रेडिंग एवं नर्लिंग सिस्टम, वेल्डिंग यूनिट्स तथा उन्नत फिनिशिंग प्रक्रियाओं का अवलोकन किया। फैक्ट्री अधिकारियों ने निर्माण के प्रत्येक चरण में अपनाई जाने वाली सटीक इंजीनियरिंग तकनीकों, गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों और वैश्विक अनुपालन मानकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
भ्रमण का एक विशेष आकर्षण कंपनी के स्वामी के साथ आयोजित इंटरैक्टिव वर्चुअल सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने उद्योग प्रवृत्तियों, निर्यात और नवाचार से जुड़े विषयों पर प्रश्नोत्तर किया। तकनीकी स्टाफ ने उत्पादन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए वास्तविक समय की संचालन प्रणाली की जानकारी भी दी।
यह भ्रमण प्रो. सत्यंत, एसोसिएट प्रो. पूनम भंडारी, अतिथि संकाय सिद्धार्थ सागरे, सुश्री श्रिजा सिंह, शिवांश पाल, श्रीमती सोनिया राणा तथा कंसल्टेंट श्री राजेश शर्मा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रकार की पहलें कक्षा आधारित शिक्षा को व्यावहारिक औद्योगिक अनुभव से जोड़ने की व्यापक शैक्षणिक दृष्टि का हिस्सा हैं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय खेल विकास नीतियों के अनुरूप है, जिनमें कौशल विकास, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण तथा भारत के खेल निर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाने पर बल दिया गया है।
इस औद्योगिक अनुभव से विद्यार्थियों की अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों, निर्माण की सटीकता, निर्यात प्रतिस्पर्धा तथा ‘मेक इन इंडिया’ क्षमताओं के प्रति समझ और अधिक विकसित हुई। साथ ही उनके विश्लेषणात्मक कौशल, व्यावसायिक आत्मविश्वास तथा खेल उद्योग में करियर जागरूकता में भी वृद्धि हुई।
अधिकारियों ने बताया कि हाल के संस्थागत सहयोग और अवसंरचनात्मक प्रगति ने ऐसे औद्योगिक सहभागिता कार्यक्रमों को और प्रोत्साहित किया है, जिससे विश्वविद्यालय खेल शिक्षा और उद्योग समन्वय के क्षेत्र में एक उभरते हुए उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।


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