सांझा साहित्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी

- कवियों ने अपनी रचनाओं से मनमोहा
करनाल।सांझा साहित्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन सेक्टर 12 स्थित हुडा कार्यालय में किया गया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में डा. कमर रईस पहुँचे। विशिष्ट अतिथि दलीप खरैरा रहे। अध्यक्षता मैडम गुरविंद्र कौर ने की।मंच संचालन सतविंद्र राणा ने किया।
कृष्ण कुमार निर्माण ने भाईचारे का संदेश देते हुए कहा कि-
कोए गैर नहीं सै जग म्हं, सभ अपणै सै,
यार यो मैं-मेरी का चस्मा हटाक्यै देख।
दिल नै दिल तै यार मिलाक्यै देख,
आपणी बी किस्मत ने आजमाक्यै देख।
अशोक मलंग बोले कि-
लाठी का जोर चलता, करती है राज लाठी,
उसकी ही भैंस समझो,जिसकी है लाठी।
धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने फरमाया कि -
- छिपाया बहुत हाल दिल का मगर, गजल जब कही आईना हो गया।
दलीप खरैरा ने कहा कि-
उलझना भी जरूरी है, सुलझने के लिए,
डगमगाना भी जरूरी है,संभलने के लिए।
इनके अलावा गुरविंद्र कौर गुरी,  जय भारद्वाज तरावड़ी, गुरमुख सिंह वड़ैच, सुरेंद्र कल्याण बुटाना, सतविंद्र राणा, हरबंस लाल पथिक, नरेश लाभ करनाल और गुलाब फक्कड़ आदि ने अपनी रचलाएं सुनाईं।
इस अवसर पर शिवम निनानिया, समर्पित कृष्ण, वरुण गुलाटी आदि मौजूद रहे।

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