सैट्रल  मार्केट काउंट डाऊन 

 कार्रवाई से पूर्व  आवास के अधिकारी लखनऊ तलब , परिसर खाली करने होंगे दुकानदारों को 

मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के सैट्रल मार्केट के बाकी बचे अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का काउंट डाऊन आरंभ हो गया है। तय तिथि नजदीक आने से पहले ही दुकानदारों ने परिसर को खाली करना आरंभ कर दिया है।  सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को अब चमत्कार का ही सहारा है।

 बता दें  सुप्रीम कोर्ट ने यहां के शेष अवैध निर्माणों से जुड़े मामले में 17 दिसंबर, 2024 को कोर्ट की ओर से जारी आदेशों को सही ठहराते हुए ध्वस्तीकरण की संभावनाओं पर मोहर लगा दी है।सुप्रीम फरमान के बाद सेंट्रल मार्किट के व्यापारी सदमे में है। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। हालत यह है कि अब वह विरोध का साहस भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट से जुड़े मामले की 27 जनवरी, 2026 को सुनवाई करते हुए अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश किए हैं। सोमवार को सुनवाई का आदेश अपलोड हुआ तो व्यापारियों में खलबली मच गई।पूरे बाजार में मायूसी छा गई। आवास एवं विकास परिषद भी सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद किसी भी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है और जो छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, उसे तैयार करने में जुट गया है। अफसरों का कहना है कि आगे जो भी आदेश होगा, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। मेरठ आवास  के अधिकारी लखनऊ में तलब किए है। जहां पर आज ध्वस्तीकरण की रणनीति बनाई जा रही है। 

शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में भूखंड संख्या 661/6 था। आवास विकास परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार,यह भूखंड वर्ष 1986 में काजीपुर निवासी वीर सिंह को आवंटित किया गया था। 30 अगस्त, 1986 को उन्हें भूखंड का कब्जा सौंपा गया।इसके बाद 6 अक्टूबर, 1988 को फ्री होल्ड डीड जारी की गई, जिसमें साफ तौर पर उल्लेख था कि यह संपत्ति केवल आवासीय उपयोग के लिए है, लेकिन कुछ ही वर्षों बाद विनोद अरोड़ा ने पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से इस संपत्ति का नियंत्रण प्राप्त कर लिया और उस पर 22 व्यावसायिक दुकानें बनवा डालीं। इसके बाद वहां कमर्शियल यूज बढ़ता चला गया।

नोटिस-नोटिस खेलते रहे, नहीं हुई कार्रवाई

- 19 सितंबर, 1990 को आवास विकास परिषद ने इस निर्माण को अवैध घोषित करते हुए नोटिस दिया और तत्काल काम रोकने की हिदायत दी। इसके बावजूद ना तो निर्माण रूका और ना ही भू उपयोग ही बदला। - 9 फरवरी, 2004 को परिषद ने निर्माण अधिनियम की धारा-83 के तहत आदेश दिया कि अवैध निर्माण रोकें नहीं तो ध्वस्त करें। - 23 मार्च, 2005 को आवास एवं विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिए जो कागजों तक सिमटे रहे। - 17 दिसंबर, 2024 को लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने 661/6 भूखंड के साथ ही ऐसे सभी निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश पारित कर दिए।

अवमानना याचिका के बाद हुआ एक्शन

कोर्ट के आदेश पर भी जब अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं हुई तो आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दायर की। इसके बाद 25 अक्टूबर को आवास एवं विकास परिषद ने 661/6 पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।

अन्य निर्माणों पर लटकी कार्रवाई की तैयार

661/6 पर बनीं 22 दुकानों के ध्वस्त होने के बाद अब शेष विवादित निर्माणों पर कार्रवाई लटक गई थी। सेकेंड राउंड में 31 और भूखंड निशाने पर थे लेकिन सांसद अरुण गोविल ने भरोसा दिलाया कि अब कोई ध्वस्तीकरण नहीं होगा।

- 28 अक्टूबर, 2025 को सपा विधायक अतुल प्रधान ने व्यापारियों के बीच पहुंचकर समर्थन किया, इससे सत्ता पक्ष में हड़कंप मच गया। - 29 अक्टूबर, 2025 को भाजपा सांसद अरुण गोविल व्यापारियों के बीच पहुंचे और बाजार खुलवाकर भरोसा दिलाया कि अब कोई दुकान नहीं टूटेगी। - 29 अक्टूबर, 2025 को ही सांसद के साथ पहुंचे कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने मास्टर प्लान संशोधन को आधार बनाकर इस बाजार को बाजार स्ट्रीट के जरिए बचाने का फार्मूला दिया।- 29 अक्टूबर, 2025 को ही महापौर ने घोषणा की कि ध्वस्त दुकानों के मालिकों को नगर निगम के नवनिर्मित कॉम्पलेक्स में दुकान आवंटित होगी।

कोर्ट ने दिए ध्वस्तीकरण के आदेश

आवास एवं विकास परिषद ने शास्त्रीनगर योजना संख्या तीन व सात में 1478 निर्माण चिह्नित किए। एक दिसंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने 661/6 की तर्ज पर इन सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही इन अवैध निर्माणों में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी रिपोर्ट तलब की।

फिर डाली गई अवमानना याचिका

आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की तरफ से फिर अवमानना याचिका दाखिल की गई। 27 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई लेकिन सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि संपूर्ण अवैध निर्माणों को ध्वस्त ना करना न्यायालय के पूर्व में जारी आदेशों की अवमानना है।

व्यापारी बोले- बर्बाद करके क्या मिलेगा

- व्यापारी आलोक सोम कहते हैं कि 40 साल जिस प्रतिष्ठान को खड़ा करने में लगा, अगर वह एक झटके में टूट जाए तो व्यापारी कहां जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, इसलिए कोई विरोध नहीं कर सकता। लेकिन हर व्यापारी यह पूछ रहा है कि जिस व्यक्ति ने याचिका डाली थी, उसे ऐसा करके क्या मिला।

- व्यापारी किशन गिरधर ने कहा कि यह आदेश व्यापारी हित में नहीं है। हमारी 38 साल से यहां दुकान है। जो कमाया, यहीं से कमाया और यहीं पर लगाया। अब यही चिंता है कि दुकान टूट गई तो क्या करेंगे। इतनी उम्र में कौन काम देगा।

छह सप्ताह में दाखिल करेंगे रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2024 के आदेश पर अभी तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी रिपोर्ट तलब कर ली है। इसके लिए आवास एवं विकास परिषद को छह सप्ताह का समय दिया गया है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद मेरठ जोन के उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। छह सप्ताह के भीतर यह विभाग को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

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