असम के कबाड़ी बांग्लादेशियों को भारत में लाते थे, अब नहीं चलेगा- पूर्व डीजीपी
पूर्व डीजी और सीएनआरसी (उत्तर प्रदेश) के प्रभारी सूर्य कुमार शुक्ल मेरठ पहुंचे
मेरठ। प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजी और सीएनआरसी (उत्तर प्रदेश) के प्रभारी सूर्य कुमार शुक्ल गुरूवार को मेरठ पहुंचे। उन्होंने यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास का भी जिक्र किया।
शुक्ल ने कहा कि असम से आए लोगों से जब नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) के दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो वे अक्सर इन्हें दिखाने में असमर्थ रहते हैं। एनआरसी का नाम सुनते ही वे घबरा जाते हैं और भागने की कोशिश करते हैं। यह दर्शाता है कि वे असम के नहीं, बल्कि बांग्लादेशी हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों को पकड़कर पूछताछ की जानी चाहिए और विदेशी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। सरकार ने हाल ही में सन 2025 में एक कड़ा कानून बनाया है, जिसके तहत अवैध रूप से लोगों को लाने वालों पर 10 साल की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
शुक्ल ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यहां के कबाड़ी असम जाकर बांग्लादेशियों को लाते हैं। उनका तर्क होता है कि स्थानीय मजदूर महंगे हैं और अधिक मजदूरी मांगते हैं, जबकि बांग्लादेशी 300 रुपये में काम करने को तैयार हो जाते हैं। इस तरह वे अपने फायदे के लिए देश के बाहर के लोगों को लाकर यहां बसाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ये लोग आधार कार्ड बनवा लेते हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की मांग करते हैं। वे वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, किसान सम्मान निधि और उज्ज्वला गैस योजना जैसी सभी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए कतार में लग जाते हैं।
शुक्ल ने कहा कि इससे भारत जैसे गरीब देश पर बोझ बढ़ता है और भीड़ बढ़ती चली जाती है। ऐसे में सरकार देश की गरीबी दूर करने और विकास कार्य करने में कैसे सफल हो पाएगी, जब दूसरे देशों के लोग भी इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए कतार में खड़े हो जाएंगे।


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