यूपी में पंचायत चुनाव टलना तय
2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही बज सकता है चुनावी बिगुल, गांव में होंगे प्रशासक नियुक्त
जनगणना और समर्पित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट ने फंसाया पेच; गांवों में प्रशासकों की नियुक्ति की तैयारी
मेरठ /लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रतीक्षा कर रहे हजारों प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए बड़ी खबर है। प्रशासनिक जटिलताओं, कानूनी अड़चनों और जनगणना के शेड्यूल के कारण आगामी पंचायत चुनावों का टलना अब लगभग तय माना जा रहा है। प्रबल संभावनाएं हैं कि अब ये चुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही संपन्न होंगे। हालांकि, सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कलेक्ट्रेट से लेकर राजधानी के गलियारों तक इसकी चर्चाएं तेज हैं।
ओबीसी आरक्षण और कानूनी पेच
योगी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से पूर्व एक 'समर्पित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग' का गठन अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यह आयोग पिछड़ों का 'रैपिड सर्वे' करेगा, जिसके आधार पर आरक्षण की नई रूपरेखा तैयार होगी। वर्तमान ओबीसी आयोग का कार्यकाल तकनीकी रूप से समाप्त हो चुका है और नए आयोग के गठन व उसकी रिपोर्ट आने में कम से कम 4 से 6 महीने का समय लगेगा।
जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं का दबाव
चुनाव टलने की एक बड़ी वजह राष्ट्रीय जनगणना भी है। मई और जून 2026 में प्रदेश में हाउस लिस्टिंग सर्वे (जनगणना का पहला चरण) प्रस्तावित है, जिसमें करीब 5 लाख सरकारी कर्मचारी तैनात होंगे। इसी दौरान बोर्ड परीक्षाएं भी होनी हैं। ऐसे में चुनाव के लिए प्रशासनिक मशीनरी उपलब्ध होना असंभव लग रहा है। फरवरी 2027 में जनगणना का दूसरा चरण और फिर विधानसभा चुनाव की अधिसूचना के चलते पंचायत चुनाव के लिए कोई समय बचता नहीं दिख रहा है।
2027 का राजनीतिक समीकरण
सूत्रों के अनुसार, भाजपा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव कराकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। अक्सर देखा जाता है कि पंचायत चुनावों में स्थानीय स्तर पर गुटबाजी बढ़ जाती है और कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ जाते हैं। इस अंतर्कलह का नुकसान विधानसभा चुनाव में न उठाना पड़े, इसलिए रणनीति यह है कि पहले विधानसभा की अग्निपरीक्षा पार की जाए।
प्रशासकों के हाथ में होगी कमान
मई के प्रथम सप्ताह में ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यदि चुनाव नहीं होते हैं, तो प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में सरकारी अधिकारियों को प्रशासक (रिसीवर) नियुक्त कर दिया जाएगा। उधर, ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि चुनाव टलने की स्थिति में वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाए ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।


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