सस्ती तकनीक और लोग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आज की सबसे ताकतवर और तेजी से बदलने वाली तकनीक में से एक बनती जा रही है। इसमें यह क्षमता है कि यह देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे, उत्पादन बढ़ाए और विकास की रफ्तार तेज करे। सरकारी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनाने में भी एआई अहम भूमिका निभा सकती है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बीमारी की शुरुआती पहचान, खेती में सही समय पर सही फैसले लेने, आपदा से पहले चेतावनी देने, मौसम और जलवायु का बेहतर अनुमान लगाने और सरकारी योजनाओं का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने में एआई पहले से ही मदद कर रही है।
आने वाले समय में शिक्षा, परिवहन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की संभावना है। लेकिन जैसे पहले की तकनीकी क्रांतियों में हुआ, वैसे ही एआई के साथ भी असमानता की तस्वीर सामने आती है। जिनके पास कंप्यूटर की ताकत यानी कंप्यूट, अच्छा डेटा और मजबूत डिजिटल ढांचा है, वही बड़े स्तर पर एआई का लाभ उठा पा रहे है। जिनके पास ये सुविधाएं नहीं है, वे पीछे रह जाते है। यह फर्क आज केवल कंपनियों के बीच ही नहीं, बल्कि देशों और इलाकों के बीच भी साफ दिखाई देता है।
भारत की सोच साफ है ऐसा डिजिटल ढांचा बनाया जाए जो खुला हो, आसानी से बढ़ सके और समाज के हर वर्ग के काम आए। इससे एआई का लाभ आम लोगों तक पहुंचे, देश में ही नवाचार को बढ़ावा मिले और तकनीक के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन सके।
इस सोच के पोंछे एक ठोस योजना है। भारत एआई को पांच स्तरों पर विकसित कर रहा है बिजली और ऊर्जा, कंप्यूट और इंफ्रास्ट्कर, चिप और हार्डवेयर, एआई मॉडल और एप्लिकेशन। इन सभी पर एक साथ काम होने से ही एआई का सही और व्यापक उपयोग संभव हो पाएगा। भारत का तरीका इसलिए अलग है क्योंकि यहां एआई तक पहुंच आसान बनाई गई है।
भारत का लक्ष्य सिर्फ एआई का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि अपना एआई बनाना है। भारत अपना खुद का एआई मॉडल तैयार कर रहा है, जो भारतीय भाषाओं, भारतीय संस्कृति और भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। भारत का यह तरीका उन देशों के लिए भी एक उदाहरण है, जो अभी विकास के रास्ते पर हैं। यह दिखाता है कि खुलेपन और नवाचार के साथ-साथ अपनी तकनीकी स्वतंत्रता कैसे बनाए रखी जा सकती है।




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