एआई में नई संभावनाएं
 राजीव त्यागी
भारत में एआई प्रौद्योगिकी को अपनाए जाने से उत्पादकता में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है। अब उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, सर्विस सेक्टर तथा अन्य क्षेत्रों में एआई के अधिक उपयोग से भारत को 2030 तक 33.8 लाख करोड़ का आर्थिक लाभ हो सकता है। इसी परिप्रेक्ष्य में उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने राष्ट्रीय श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे के तहत स्वीकार किया है कि भारत का श्रम बाजार ढांचागत बदलाव से गुजर रहा है और अब एआई और नए कौशल विकास पर जोर देना जरूरी है।

 नीति आयोग की रिपोर्ट रोडमैप फॉर जॉब क्रिएशन इन द एआई इकोनॉमी 2025 के मुताबिक एआई के बढ़ते प्रभाव से जहां 2031 तक बड़ी संख्या में पारंपारिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं, वहीं एआई से जुड़ी करीब 40 लाख नई नौकरियां निर्मित होते हुए दिखाई देंगी। ऐसे में देश की नई पीढ़ी के लिए एआई आधारित नौकरियों के बढ़ते अवसरों के बीच नई पीढ़ी को एआई पेशेवर के रूप में सुसज्जित करने की बड़ी चुनौती भी सामने खड़ी हुई है।
 स्थिति यह है कि अगर इस परिप्रेक्ष्य में तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो भारत न केवल दूसरे देशों से एआई प्रतिभा के क्षेत्र में पीछे हो जाएगा, बल्कि एआई से होने वाले बहुआयामी विकास में भी पिछड़ जाएगा। ऐसे में हमें देश की नई पीढ़ी को एआई स्किल्स से सुसज्जित करने की नई रणनीति के साथ आगे बढऩा होगा। यह सराहनीय कदम है कि शिक्षा मंत्रालय ने नई पीढ़ी को प्रारंभिक स्तर से ही भविष्य की तकनीक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जोड़े जाने के मद्देनजर आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से देशभर के सभी स्कूलों में तीसरी कक्षा से ही एआई पढ़ाने का फैसला किया है।

    इसके साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि हैदराबाद स्थित उसका ‘इंडिया साउथ सेंट्रल क्लाउड रीजन’ साल 2026 के मध्य में शुरू हो जाएगा, जिसका कुल आकार लगभग दो ईडन गार्डन स्टेडियम के बराबर है। कंपनी ने भारत में एआई स्किल्स से लैस टैलेंट डेवलप करने के अपने लक्ष्य को एक करोड़ से दोगुना करते हुए 2030 तक दो करोड़ लोगों को एआई स्किल्स देने का संकल्प लिया है। ऐसे में यह भी जरूरी है कि देश के कोने-कोने में विशेषतया ग्रामीण और पिछड़े हुए क्षेत्रों में एआई से रोजगार के मद्देनजर एआई स्किल्स से जुड़ी प्रोग्रामिक भाषाओं से बड़ी संख्या में युवाओं को कुशल बनाने के कई गुना प्रयास करने होंगे। 

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