बसंतकालीन गन्ना बुवाई एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि आगामी पेराई सत्र की सफलता का आधार है’’-ब्रजेश पटेल

21 जनवरी से पूर्व चीनी मिलों एवं परिषदों को बसन्तकालीन बुवाई हेतु माईक्रोप्लान तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश

गन्ना बीज उपलब्धता, प्रजातीय संतुलन और बीज परिवर्तन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश, एक ही प्रजाति पर निर्भरता खत्म करने पर ज़ोर।

गन्ना ढुलाई, ट्रांसपोर्ट व्यवस्था और मिल यार्ड प्रबंधन को लेकर दिये गये सख्त निर्देश

मेरठ। बुधवार को गन्ना भवन के सभागार गन्ना विकास विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी उप गन्ना आयुक्त, परिक्षेत्र मेरठ ब्रजेश कुमार पटेल द्वारा की गई। जिसमें बसंतकालीन गन्ना बुवाई, बीज प्रबंधन, गन्ना ढुलाई, चीनी मिलों द्वारा बीज अनुरक्षण एवं बंसन्तकालीन बुवाई में बीज बदलाव तथा कृषकों को अनुदान दिये जाने, गन्ना मूल्य भुगतान तथा किसानों की सुविधाओं जैसे मूलभूत विषयों को केंद्र में रखते हुए गहन समीक्षा की गई।

बैठक में  प्रभारी उप गन्ना आयुक्त द्वारा कहा गया कि बसंतकालीन गन्ना बुवाई 2025-26 केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि आगामी पेराई सत्र की सफलता का आधार है। प्रभारी उप गन्ना आयुक्त ने निर्देश दिए कि परिक्षेत्र के अंतर्गत गन्ना क्षेत्रफल में वृद्धि को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक स्तर पर सुनियोजित प्रयास किए जाएं। विशेष रूप से उन कृषकों से संपर्क स्थापित करने पर ज़ोर दिया गया, जिन्होंने विगत वर्षों में गन्ना बुवाई कम कर दी थी, ताकि उन्हें पुनः गन्ना खेती के लिए प्रेरित किया जा सके। गन्ना बीज उपलब्धता और प्रजातीय प्रबंधन को बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय मानते हुए यह स्पष्ट किया गया कि गन्ना बीज की कमी या एक ही प्रजाति पर अत्यधिक निर्भरता से दीर्घकालीन समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। निर्देश दिए गए कि बीज उत्पादक कृषकों के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ गन्ना बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। यह भी स्पष्ट किया गया कि गन्ना बीज बदलाव के अन्तर्गत गन्ना किसानों को गन्ना बीज वितरण में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।

गन्ना ढुलाई और मिल यार्ड प्रबंधन को लेकर बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि किसान की सुविधा और सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। ट्रॉली अथवा ट्रक से गन्ना ढुलाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन, समयबद्ध आपूर्ति तथा मिल यार्डों में पेयजल,अलाव,बैठने, प्रकाश और स्वच्छता जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। यह भी कहा गया कि अव्यवस्था या लापरवाही की स्थिति में संबंधित मिलों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

पेराई सत्र की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रभारी उप गन्ना आयुक्त ने चीनी मिलों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि गन्ना खरीद, पेराई, चीनी उत्पादन, परता एवं भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर यह स्पष्ट किया गया कि किसान हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है और मिलों को विभागीय निर्देशों का अक्षरशः पालन करना होगा।

बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि बसंतकालीन गन्ना बुवाई को प्रभावी बनाने के लिए प्रचार-प्रसार को औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए इसे फील्ड आधारित अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। कृषक गोष्ठियों, प्रत्यक्ष संवाद, फील्ड विज़िट, बीज अनुरक्षण पर अनुदान तथा अन्य माध्यमों से किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, ट्रेंच विधि, सहफसली खेती और गन्ना उत्पादन बढ़ाने के उपायों से अवगत कराया जाएगा।

समीक्षा बैठक में मानव संसाधन से संबंधित प्रकरणों में कार्मिकों/अधिकारियों की एसीआर अपलोडिंग, ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य प्रगति, आई-गोट पोर्टल पर कार्मिकों द्वारा वांछित कोर्स एवं प्रमाण-पत्र, न्यायालयों में लंबित वादों, वित्तीय अनुशासन के अंतर्गत विगत पाँच वर्षों के लेखों की जाँच, आडिट एवं बैंक समाधान पत्रों की समयबद्ध तैयारी, समिति ऋण वसूली, जीर्णाेद्धार एवं विभागीय भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति से संबंधित समस्त विषयों पर भी समीक्षा की गई।बैठक में मेरठ परिक्षेत्र के संभागीय विख्यापन अधिकारी, अपर सांख्यिकी अधिकारी, सहायक चीनी आयुक्त, सहित सभी जिलों के ज्येष्ठ विकास निरीक्षक, सचिव, एवं सभी मिलो के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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