सोना व चांदी रच रहे इतिहास
आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही सोना -चांदी
प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी चमक लौटी
3 लाख रुपये किलो हुए चांदी के भाव
नयी दिल्ली। भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर चांदी का भाव 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गया है। जो चांदी अप्रैल महीने में महज 95-96 हजार रुपये प्रति किलो के आसपास रेंग रही थी, वो अब आसमान छूते हुए 3,00,532 रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है। बाजार में आई यह तूफानी तेजी सिर्फ सामान्य मांग का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे दुनिया की दो महाशक्तियों अमेरिका और यूरोप के बीच छिड़ी एक नई आर्थिक ‘जंग’ है। इसका असर मध्यम वर्ग पर सबसे अधिक पड़ रहा है। पीली व सफेद धातु उनकी पहुंच से दूर होती जा रही है।
अगर आपने पिछले 9 महीनों में किसी शेयर या जमीन के बजाय चांदी में पैसा लगाया होता, तो आज आपका मुनाफा देखकर हर कोई हैरान रह जाता।अप्रैल से लेकर अब तक चांदी ने अपने निवेशकों को 200 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। शेयर बाजार की भाषा में कहें तो यह किसी ‘मल्टीबैगर’ शेयर जैसा प्रदर्शन है।
हैरानी की बात यह है कि सिर्फ जनवरी महीने में ही अब तक कीमतों में करीब 25 प्रतिशत का उछाल आ चुका है। फिलहाल, निवेश के लिहाज से चांदी बाकी सभी एसेट क्लास (जैसे प्रॉपर्टी या शेयर) को पछाड़कर सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली संपत्ति बन गई है।
ट्रेड वॉर का खतरा
बाजार में मचे इस हड़कंप की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी महत्वकांक्षी योजनाएं हैं. दरअसल, ट्रंप ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। जिन यूरोपीय देशों ने उनकी इस योजना का विरोध किया, अब वे ट्रंप के निशाने पर हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन समेत आठ यूरोपीय देशों पर भारी-भरकम टैरिफ (आयात शुल्क) लगाएंगे।
खबर है कि 1 फरवरी से इन देशों के सामानों पर 10% शुल्क लागू होगा, जो जून आते-आते 25% तक बढ़ जाएगा. अमेरिका के इस कदम ने निवेशकों को डरा दिया है।जब भी दो बड़े देशों में व्यापार युद्ध (Trade War) की स्थिति बनती है, तो लोग करेंसी या शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने-चांदी में लगाना सुरक्षित समझते हैं, और यही अभी हो रहा है।
आमने सामने हैं अमेरिका और यूरोप
मामला सिर्फ अमेरिका की कार्रवाई तक सीमित नहीं है. यूरोपियन यूनियन (EU) भी चुप बैठने के मूड में नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अन्य यूरोपीय नेता जवाबी हमले की तैयारी कर रहे हैं। यूरोप अमेरिका के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली हथियार ‘एंटी-कोर्शन इंस्ट्रूमेंट’ (ACI) का इस्तेमाल कर सकता है। इसके तहत अमेरिकी माल पर करीब 93 अरब यूरो (108 अरब डॉलर) का जवाबी टैक्स लगाने की चर्चा है।इस तनाव का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर दिख रहा है. सिंगापुर में स्पॉट गोल्ड 1.6% चढ़कर 4,668 डॉलर प्रति औंस और चांदी 93 डॉलर के पार पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी चमक लौटी है।
डॉलर पर भरोसा नहीं रहा?
बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात सोने-चांदी के लिए ‘आदर्श’ हैं। कैपिटल डॉट कॉम के विश्लेषक काइल रोड्डा का कहना है कि अमेरिका की विदेश नीति और फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) पर ट्रंप प्रशासन के लगातार हमलों ने डॉलर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
इसे बाजार में ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ कहा जा रहा है, जहां बढ़ते कर्ज और सरकारी नीतियों की अनिश्चितता के चलते निवेशक सरकारी बॉन्ड और करेंसी से दूर भाग रहे हैं। वेनेजुएला के नेता की गिरफ्तारी और ग्रीनलैंड विवाद ने आग में घी का काम किया है. अगर यह तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के भाव और भी नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।


No comments:
Post a Comment