विश्व की बदलती परिस्थिति को देख अपने को मजबूत करने में जुटा भारत
आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को नई टेक्नोलॉजी से लैस करने की तैयारी
नयी दिल्ली। देश और दुनिया के सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो गया है। यही कारण है कि मिसाइल के साथ ही फाइटर जेट, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन सिस्टम, आर्टिलरी, एयरक्राफ्ट कैरियर आदि में हजारों-लाखों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अब भारत एक साथ आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को नई टेक्नोलॉजी से लैस करने में जुटा है, ताकि आर्म्ड फोर्सेज को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ने में सक्षम बनाया जा सके।
दुनिया के बदलते हालात को देखते हुए दुनिया के तमाम देश ऐसे वेपन सिस्टम डेवलप करने में जुटे हैं, जिससे अपनी जमीन से ही ऐसा वार किया किया जाए कि दुश्मन चारों खाने चित्त हो जाए। इसमें कटिंग एज टेक्नोलॉजी की मदद से डेवलप किए जा रही मिसाइल्स की भूमिका काफी अहम है। रेंज और घातक क्षमता में वृद्धि की वजह से आधुनिक मिसाइलें काफी कारगर साबित हो रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने अपनी क्षमता से पूरी दुनिया को अवगत कराया था। ब्रह्मोस के प्रचंड प्रहार से पाकिस्तान के हौसले के परखच्चे उड़ गए और वो सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। Su-30MKI फाइटर जेट की रफ्तार और ब्रह्मोस की मार से पाकिस्तान आज तक कराह रहा है। अब इसी ब्रह्मेस मिसाइल को अपग्रेड किया जा रहा है। ब्रह्मोस-NG यानी ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन में ऐसी खासियत एड की गई हैं कि दुश्मनों के होश उड़ जाएंगे। ब्रह्मोस का मौजूदा वर्जन (Brahmos-A) Su-30MKI फाइटर एयरक्राफ्ट में फिट होता है। दिक्कत यह है कि वजन ज्यादा होने की वजह से फिलहाल एक ही ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल Su-30MKI फाइटर जेट में फिट या इंटीग्रेट होती है। लेकिन, ब्रह्मोस-NG मिसाइल को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि वजन तो कम हो पर उसकी लेथेलिटी (घातक होने की क्षमता) पर कोई असर न पड़े। बताया जा रहा है कि ब्रह्मोस-NG के डेवलप होने के बाद Su-30MKI जेट में एक साथ ऐसी 5 मिसाइलें इंटीग्रेट की जाएंगी। इससे एक तरह जहां साल्वो अटैक (एक ही समय में ताबड़तोड़ कई प्रहार) करना संभव हो सकेगा। वहीं दुश्मनों को संभलने का मौका दिए बगैर उसे पूरी तरह से तबाह किया जा सकेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक के नूर खान एयरबेस पर ब्रह्मोस से अटैक किया गया था, जिससे पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ था।
भारतीय वायुसेना की हवाई हमले की क्षमता आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने वाली है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की जा रही ब्रह्मोस-एनजी (नेक्स्ट जेनरेशन) मिसाइल, मौजूदा ब्रह्मोस फैमिली की घातक ताकत को और अधिक प्रभावी रूप में पेश करेगी। सबसे अहम बात यह है कि यह मिसाइल आकार और वजन में कहीं अधिक हल्की होगी, जिससे लड़ाकू विमानों पर इसके इस्तेमाल की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस-एनजी के आने से भारतीय वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट की स्ट्राइक लोड क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हो सकती है। ब्रह्मोस-NG की सबसे बड़ी खासियत इसका वजन है। मौजूदा एयर-लॉन्च्ड ब्रह्मोस-A मिसाइल का वजन लगभग 2,900 किलोग्राम है। जिसकी वजह से Su-30MKI केवल एक ही मिसाइल ले जाने में सक्षम है। इसके मुकाबले ब्रह्मोस-NG का अनुमानित वजन करीब 1.2 टन (1200 किलोग्राम) यानी लगभग आधा से भी कम होगा। हालांकि, इसकी मारक दूरी करीब 300 किलोमीटर ही रहने की संभावना है, जो मौजूदा ब्रह्मोस के बराबर है, लेकिन वजन में भारी कमी इसे कहीं अधिक बहुउपयोगी बना देती है।
रक्षा मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट idrw.org के अनुसार, ब्रह्मोस-NG के हल्के डिजाइन की वजह से संशोधित Su-30MKI को एक साथ 5 मिसाइलें ले जाने के लिए कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। यदि यह योजना साकार होती है, तो यह भारतीय वायुसेना के लिए बड़ी रणनीतिक छलांग साबित होगी। अभी जहां एक विमान केवल एक ब्रह्मोस-A मिसाइल से हमला कर पाता है, वहीं भविष्य में एक ही विमान से कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक प्रहार संभव हो सकेगा। इससे न केवल हमले की तीव्रता बढ़ेगी, बल्कि दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता भी मजबूत होगी। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर 5 मिसाइलों वाले कॉन्फ़िगरेशन की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा पहले किए गए प्रदर्शनों से कुछ संकेत जरूर मिले हैं।


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