जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ कंपोज़िट पॉलिमर,ग्रीन एनर्जी और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर सहयोग की दिशा में अहम बैठक

सीसीएसयू में अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को मिलेगा नया आयाम

 मेरठ। चौ. चरण सिंह विवि में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से जर्मनी की  टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज़, wildau ,जर्मनी के साथ एक महत्वपूर्ण अकादमिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विवि के कुलपति कार्यालय समिति कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तुतीकरण एवं आपसी संवाद के माध्यम से भविष्य में संयुक्त अनुसंधान, नवाचार तथा शैक्षणिक सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

 कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब हाल ही में जर्मनी के चांसलर द्वारा भारत का दौरा कर प्रधानमंत्री से ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन फ्यूल, सतत विकास एवं तकनीकी सहयोग को लेकर आगे मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की गई थी। इसी वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह कार्यक्रम भारत-जर्मनी शैक्षणिक एवं शोध सहयोग की दिशा में एक स्वाभाविक और सार्थक एलाइनमेंट के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय निरंतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को विस्तार देने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय परंपरा के अनुरूप उत्तरायण के आरंभ का प्रतीक है, जब सूर्य सकारात्मक दिशा में गति करता है। इसी प्रकार यह अकादमिक संवाद भी विवि के लिए नई दिशा, नई ऊर्जा और नए अवसरों का संकेत है।

 कुलपति ने कहा कि कंपोज़िट पॉलिमर, फोटोनिक्स, हाइड्रोजन एनर्जी, फोटो-कैटालिटिक तकनीक एवं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में यह सहयोग विवि की शोध क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

इस अवसर पर सीासीएसयू  की ओर से विस्तृत प्रस्तुति प्रो. बीरपाल सिंह, निदेशक, अनुसंधान एवं विकास द्वारा दी गई। उन्होंने विवि में उपलब्ध अनुसंधान अवसंरचना, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, फैकल्टी विशेषज्ञता, शोधार्थियों की संख्या तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ग्रीन एनर्जी, उन्नत सामग्री विज्ञान एवं उभरती तकनीकों में वैश्विक भागीदारी के लिए पूर्ण रूप से तैयार है।

जर्मनी की ओर से प्रो. डॉ. क्रिश्चियन ड्रेयर तथा डॉ. किरील दिमित्रोव ने अपनी प्रस्तुति में उन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया जिनमें दोनों संस्थान मिलकर कार्य कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कंपोज़िट पॉलिमर सामग्री के माध्यम से हल्की, मजबूत एवं ऊर्जा-दक्ष संरचनाएं विकसित की जा सकती हैं, जिनका उपयोग एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल एवं औद्योगिक अनुप्रयोगों में किया जा रहा है।

उन्होंने फोटोनिक्स के क्षेत्र में प्रकाश आधारित उन्नत तकनीकों, सेंसर सिस्टम एवं ऊर्जा कुशल उपकरणों के विकास पर संयुक्त अनुसंधान की संभावनाएं बताईं। इसके साथ ही हाइड्रोजन एनर्जी को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा के रूप में विकसित करने, हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण एवं उपयोग से जुड़ी तकनीकों पर भी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रस्तुतीकरण में फोटो-कैटालिटिक तकनीक पर विशेष चर्चा हुई, जिसके माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, जल एवं वायु शुद्धिकरण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उन्नत सामग्री, हल्के कंपोज़िट स्ट्रक्चर एवं उच्च प्रदर्शन तकनीकों पर संयुक्त कार्य की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंतर्गत भौतिकी विभाग, सीसीएसयू  में विद्यार्थियों के साथ एक विशेष व्याख्यान एवं संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने कंपोज़िट पॉलिमर,ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन फ्यूल, फोटोनिक्स एवं एयरोस्पेस तकनीक से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका जर्मन विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से समाधान प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने इस संवाद को अत्यंत प्रेरणादायक बताया।

इस अवसर पर प्रोफेसर भूपेंद्र सिंह, प्रोफेसर दिनेश कुमार, प्रोफेसर राकेश कुमार सोनी, प्रोफेसर अतवीर सिंह, प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा, प्रोफेसर अनुज कुमार, प्रोफेसर रमाकांत, प्रोफेसर मुकेश कुमार शर्मा, प्रोफेसर शैलेन्द्र शर्मा, डॉक्टर दुष्यंत चौहान, डॉक्टर जितेंद्र कुमार, डॉक्टर संजीव शर्मा, डॉक्टर विजेता गौतम, डॉक्टर अंशु चौधरी, डॉक्टर नाजिया तरन्नुम, डॉक्टर सरू कुमारी, डॉक्टर वैशाली पाटिल, डॉक्टर योगेंद्र गौतम, डॉक्टर जितेंद्र गोयल, मीडिया सेल सदस्य मितेंद्र कुमार गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षकगण, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

इस अंतरराष्ट्रीय संवाद के माध्यम से भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाएं, अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन, छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रम, उद्योग सहयोग तथा  अनुप्रयुक्त अनुसंधान को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल करने पर संभावनाएं बनी। यह कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को ग्रीन एनर्जी और उन्नत तकनीकी अनुसंधान के वैश्विक मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts