आयोग के पीआरओ से मिले अभ्यर्थी, सौंपा ज्ञापन

 प्रश्न पत्र की विसंगति पर जमा किए साक्ष्य
प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में हिंदी प्रवक्ता पद के लिए हुई परीक्षा में हिंदी विषय के प्रश्न पत्र के 70 में से 18 सवाल के एक ही कुंजी से हूबहू पूछे जाने पर हिंदी के अभ्यर्थियों ने शिक्षा सेवा आयोग के पीआरओ से मुलाकात की। इस दौरान अभ्यर्थियों ने ज्ञापन के साथ ही विसंगतियों से संबंधित साक्ष्य भी सौंपा।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि विज्ञापन संख्या 51 की परीक्षा और खासकर हिंदी विषय की परीक्षा की बुनियाद चरण दर चरण विसंगतियों से संलिप्त होती चली जा रही है, आयोग ने जहां एक तरफ़ बगैर रेंडमाइजेशन किए परीक्षा कराया जिसका परिणाम अत्यंत भयावह रहा, 4 - 4 के ग्रुप में एक क्रम से रोल नंबर वालों का साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना पूरी परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता  को जहां प्रश्नांकित करता है वहीं हिंदी विषय के पाठ्यक्रम और सवालों में अनुरूपता का अभाव के साथ साथ एक हैरत करने वाला साक्ष्य मिला जिसमें हिंदी विषय के प्रश्न पत्र में 70 में से 18 सवाल हूबहू विकल्पों में आंशिक क्रम के हेरफेर के साथ भार्गव पब्लिशिंग हाउस, प्रायगराज़ से प्रकाशित टीजीटी, पीजीटी परीक्षा के स्तर के एक कुंजी से मैच कर रहा है।
गौरतलब है कि यह कुंजी अमेजन पर विक्रय हेतु नंबर 2024 से ही उपलब्ध है, और अमेजन का ग्राफ बता रहा है कि फ़रवरी से अप्रैल 2025 के बीच यह कुंजी अपने विक्रय के उच्चतम स्तर पर है| ऐसे में यह घटना परीक्षा की शुचिता और विषय विशेषज्ञों पर संदेह पैदा करती है।
ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी उच्च स्तरीय परीक्षा में किसी टीजीटी- पीजीटी हेतु निर्मित कुंजी के प्रैक्टिस सेट से 70 में से 18 प्रश्नों का हूबहू क्रमिक रूप से पूछा जाना अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ सीधे सीधे धोखा है तथा आयोग की गंभीरता और शुचिता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। अभ्यर्थियों की मांग है कि ऐसी परीक्षा जिसकी बुनियाद चरण दर चरण विसंगतियों से भरी हो उसे तत्काल निरस्त कर शीघ्र ही पुनः पारदर्शी ढंग से परीक्षा की तिथि घोषित की जाए।

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