बहता नीर’ की नाट्य प्रस्तुति ‘रंगा धुर्वा’ ने दिया संदेश

मेरठ। माधवपुरम स्थित बहता नीर स्टूडियो में ‘एक्स्ट्रा एन ऑर्गेनाइजेशन, प्रयागराज’ और ‘कम्युनिटी थिएटर टोंक सोसायटी’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘बहता नीर’ की नाट्य प्रस्तुति ‘रंगा धुर्वा’ का सफल मंचन किया गया।
सोनू यादव द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक ने बस्तर की पृष्ठभूमि के जरिए विकास और राजनीति के पीछे छिपे रक्तरंजित सच को उजागर किया। मंच पर रंगा धुर्वा के मुख्य किरदार में अरुण कटारिया ने अपने जीवंत अभिनय से एक ऐसी ‘जिंदा लाश’ की व्यथा को बखूबी दर्शाया, जो व्यवस्था की गुलामी और अपने ही गुनाहों के बोझ तले दबा है।
नाटक में दिखाया गया कि कैसे राजनीति इंसान को भूख की आड़ में ‘पालतू’ बना देती है और धर्म का सहारा लेकर रोटी के बदले नफरत बाँटती है। बैकस्टेज में सबिता एकांशी ने अपने लिखे गीत और गायन से दर्शकों को रंगा के मानसिक द्वंद्व को महसूस कराया। संगीत में सहयोग दिया था श्री कृष्ण नीरज और सोनू यादव ने। प्रकाश परिकल्पना श्री कृष्ण नीरज की थी। जबकि अजीत बहादुर, राजकुमार रजक, रैनाराहा रजक और हरमेंद्र सरताज का विशेष सहयोग रहा।
नाटक के समापन के पश्चात एक विशेष चर्चा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें नाटक की प्रासंगिकता, सामाजिक उपयोगिता और वर्तमान दौर में इसके महत्व पर विस्तार से संवाद हुआ। शोध छात्र मोहित यादव ने माना कि कला जब व्यवस्था के पाखंड को चुनौती देती है तभी वह सार्थक होती है। इसी क्रम में बहता नीर के मंच पर काव्य पाठ का भी आयोजन किया गया, जिसमें युवा कवियों व कलाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
युवा कवि सबिता एकांशी, श्री कृष्ण नीरज, अखिलेश कुमार मौर्य, गुड़िया यादव और प्रियंका कुमारी ने अपनी कविताओं का पाठ किया, वहीं युवा शायर सोनू यादव ने अपनी गज़लों और अरुण कुमार ने मधुर गीत की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर प्रोफेसर स्वर्णलता कदम, अभिषेक कुमार, दिनेश कुमार, मोहित यादव, कपिल सहित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शोधार्थीगण एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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