सोशल मीडिया और सत्य: तथ्य जांच का महत्व
- संध्या अग्रवाल
आज का दौर डिजिटल है। हर पल खबरें, विचार और राय हमारे सामने आती हैं। हर व्यक्ति अपनी बात रखने में स्वतंत्र है, लेकिन क्या हर राय या हर सूचना भरोसेमंद होती है? यही सवाल हमें सोचने पर मजबूर करता है और यही विश्व तथ्य-जाँच दिवस का संदेश है। यह केवल एक दिन नहीं, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि सूचना का मूल्य समझना हमारी जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया पर हर खबर तेजी से फैलती है। कभी-कभी यह खबर सही होती है, कभी आंशिक और कई बार पूरी तरह झूठ। लोग बिना जांच-परख के इसे साझा कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप भ्रम, डर और समाज में तनाव पैदा होता है। तथ्य-जाँच न केवल सत्य की रक्षा करती है, बल्कि समाज को जागरूक और सशक्त भी बनाती है।
आज एआई और डिजिटल युग में, खबरें इतनी तेज़ी से फैलती हैं कि हमें कई बार फेक न्यूज भी सत्य प्रतीत होती हैं। ऐसे समय में हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हर सूचना को निष्पक्ष तरीके से जाँचना और तथ्य की पुष्टि करना जरूरी है, ताकि समाज में झूठ और भ्रम न फैले।हम अक्सर भूल जाते हैं कि राय और तथ्य अलग चीजें हैं। राय व्यक्तिगत दृष्टिकोण, अनुभव या भावना होती है, जबकि तथ्य जाँच योग्य जानकारी होती है, जिसे प्रमाणित किया जा सके। जब राय को तथ्य की तरह फैलाया जाता है, तो यह समाज में भ्रम और विवाद का कारण बन सकता है।
आज हर व्यक्ति सोशल मीडिया पत्रकार बन गया है। कोई ट्वीट, पोस्ट या वीडियो देखता है और तुरंत प्रतिक्रिया देता है। यही प्रवृत्ति तथ्य-जाँच को आवश्यक बनाती है। सत्य की पहचान करना सिर्फ मीडिया का काम नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी भी है।अक्सर ऐसी खबरें हमारे जीवन की दिशा बदल देती हैं—छोटे निर्णयों से लेकर बड़े सामाजिक निर्णय तक। जांच परख के बिना साझा किया गया कोई भी तथ्य हमें और हमारे प्रियजनों को प्रभावित कर सकता है।
तथ्य-जाँच केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, यह सोचने की आदत भी है। स्रोत की पहचान, प्रमाण और तारीख़ की जांच, तटस्थ दृष्टिकोण रखना और विशेषज्ञ तथा आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि करना, ये सभी कदम अपनाकर हम सिर्फ सत्य की रक्षा नहीं करते, बल्कि हमारे विचार और समाज की समझ भी गहरी होती है।
11 जनवरी को विश्व तथ्य-जाँच दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि हम यह समझें—सूचना शक्ति है, और शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी आती है। हर खबर पर तर्क और प्रमाण अपनाएं, राय और तथ्य में अंतर जानें और डिजिटल तथा वास्तविक दुनिया में सोच-समझकर निर्णय लें।
विश्व तथ्य-जाँच दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर बार सोचने और जवाबदेही की आदत बनाता है। जब हम हर सूचना की पुष्टि करना सीखते हैं, तो न केवल समाज में सत्य का योगदान देते हैं, बल्कि अपने जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाते हैं। सत्य, जागरूकता और जिम्मेदारी—ये तीन मूलमंत्र हैं। इस दिन को केवल याद करने के बजाय इसे जीने और अपनाने की प्रेरणा बनाना ही असली उद्देश्य है।
(शक्ति नगर, जबलपुर)





No comments:
Post a Comment