कुत्ते ने काटा तो देना होगा भारी मुआवजा

- जगतपाल सिंह
सर्वोच्च न्यायालय ने देश में लावारिस कुत्तों द्वारा काटने की निरंतर बढ़ रही घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता, और जस्टिस एनवी अंजरिया की विशेषपीठ ने सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहां की कुत्तों के काटने पर देना होगा भारी मुआवजा, आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाले भी जवाबदेह होंगे और लावारिस कुत्तों की चिंता करने वाले ऐसे कुत्तों को अपने घर रखें।
सर्वोच्च न्यायालय ने सड़कों पर कुत्तों को खुला छोड़कर लोगों को डराने और काटने देना स्वीकार नहीं, राज्य सरकार व स्थानीय निकायों को भारी मुआवजा चुकाना होगा सुप्रीम कोर्ट द्वारा जवाबदेही अबतय की जाएगी। विशेष न्यायपीठ न्यायाधीशों ने  चिंता जताते हुए पूछा जब नौ साल की बच्चा कुत्ते के हमले का शिकार होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा  लावारिस कुत्ते किसी के स्वामित्व  नहीं होते और यदि कोई उन्हें पालना चाहता तो उसे कानून के तहत लाइसेंस लेकर पालतू बनाना चाहिए  पिछले दिनों न्यायालयके एक आदेश के तहत बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल कॉलेज और अन्य सार्वजनिक स्थान से लावारिस कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे और कुत्तों का टीकाकरण और नियमों के तहत नसबंदी की जाए और उन्हें उसी स्थान पर वापस ना छोड़ा जाए।
देश की अदालतों में इस प्रकार के मामले विचाराधीन है लंबे समय तक  चक्कर काटने के बाद पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता है। आजकल तो देश में कुत्ता पालने का कुछ ज्यादा ही चलन चल गया है लोग सुबह शाम कुत्तों को सड़कों पर चौराहे पर पार्कों में घूमाने ले जाते हैं और उस समय भी घटनाएं घट जाती हैं। कुत्तों की  नस्लों को भी रखने का प्रचलन प्रतिस्पर्धा का रूप लगातार देश में ले रहा है महंगे से महंगे कुत्ते अपने शौक में लोग रख रहे हैं अब तो यह भी एक स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की बात की जाए तो पशु जानवर विशेष कर कुत्ते के प्रति एक धारणा लंबे समय से चली आ रही है और उसमें कुछ वास्तविकता भी दिखती है कि कुत्ता इंसानों से ज्यादा वफादार माना गया है प्राचीन समय में तो कुत्ता ही घर की पूरी देख करता था प्रेम और स्नेह का रूप कुत्ते में देखा जाता था आज मानव का स्वभाव जिस तेजी से  अपने स्वार्थ में  बदल रहा है उतनी ही तेजी से कुत्तों के अंदर भी बदलाव देखने को मिल रहा है।                          
 देश में कुत्तों के प्रति क्रूरता रोकने के लिए मुख्य रूप से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 इसके तहत बनाए गए पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम 2001 और 2023 है जो कुत्तों को पर्याप्त भोजन आश्रयर्और देखभाल न देने अनावश्यक पीड़ा देने या मारने पर जुर्माना या सजा का प्रावधान करते हैं जिसमें आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए भी नियम शामिल है। एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल 2023 के तहत स्टेरलाइजेशन( नसबंदी) को ही एकमात्र तरीका बताया है जिससे कुत्तों की आबादी नियंत्रित हो सके नेकी उन्हें मारना यदि कोई व्यक्ति किसी भी जानवर को मारता या विकलांग करता है तोभारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता आपराधिक प्रक्रिया के तहत दो वर्ष से पाच वर्ष तक की सजा हो सकती है।


अब सवाल यह उठता है कि देश में आवारा पशुओं विशेष कर कुत्तों के द्वारा काटने की जो घटनाएं हो रही है उन पर रोक पूर्ण रूप से लग सकेगी। साथ ही समाज के प्रबुद्ध वर्ग को इस पर चिंतन मनन करना चाहिए।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts