कानून अपने हाथ में लेने के लिए लोगों को उकसा रही ममता बनर्जी

 सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का एफिडेविट

  नयी दिल्नी । चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि ममता बनर्जी जनता को आयोग के खिलाफ भड़का रही हैं. उनके उकसावे पर हमले हो रहे हैं। आयोग ने तृणमूल मंत्रियों और विधायकों पर भय का माहौल बनाने का भी आरोप लगाया है।

कोलकाता. एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपनी ओर से एफिडेविट दाखिल किया है। एफिडेविट में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल नेता ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाये हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया में सहयोग करने के बजाय ममता बनर्जी ने कदम कदम पर बाधा उत्पन्न किया है। वो जनता को आयोग के खिलाफ भड़का रही हैं। उनके उकसावे पर चाकुलिया में बीडीओ कार्यालय पर 700 उपद्रवियों ने हमला कर दिया। आयोग ने तृणमूल मंत्रियों और विधायकों पर भय का माहौल बनाने का भी आरोप लगाया है।

चुनाव आयोग के एफिडेविट की मुख्य बातें

आयोग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चुनाव अधिकारियों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, ममता ने सीधे तौर पर लोगों को “कानून अपने हाथ में लेने” के लिए उकसाया है। एफिडेविट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के बयान ने ऐसा माहौल बना दिया है जहां ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को अपने काम में बाधा उत्पन्न हुई। आयोग ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने 14 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक माइक्रो ऑब्जर्वर को विशेष रूप से निशाना बनाया और उसे डराया-धमकाया। उत्तरी दिनाजपुर जिले के चाकुलिया में लगभग 700 लोगों की भीड़ ने एक कार्यालय में तोड़फोड़ की. उन्होंने मतदाता सूची में सुधार के लिए इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर को नष्ट कर दिया।14 जनवरी को, 9 माइक्रो ऑब्जर्वरों ने हिंसा और सुरक्षा की कमी के कारण अपने कर्तव्यों से मुक्ति का अनुरोध करते हुए पत्र प्रस्तुत किए।आयोग का आरोप है कि महिलाओं का समूह मतदाता सूची में संशोधन के काम में लगे अधिकारियों को घेर रही है और नारे लगाकर उनके काम में बाधा डाल रही है। आयोग ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस बीएलओ की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है. पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति को अन्य राज्यों की तुलना में ‘चिंताजनक’ बताया गया है।

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