एम्स की इसलिए दरकार ,यहां कई बीमारियों का नहीं होता उपचार
फरवरी में संसद में पेश होने वाले बजट में मेरठ को मिल सकता है एम्स की सौगात
मेरठ। मेरठ में एम्स की जरूरत इसलिए है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली या अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है, एक एम्स बनने से उन्हें बेहतर और सस्ती सुपरस्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। डॉक्टरों की कमी पूरी होगी, और स्थानीय मेडिकल कॉलेज को भी राष्ट्रीय स्तर का दर्जा मिल सकेगा, जिससे पूरे क्षेत्र को फायदा होगा और स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी रोग, हृदय रोग के लिए मेरठ और आसपास के जिलों के मरीजों को दिल्ली के एम्स जैसे संस्थानों में जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होता है।
वेस्ट यूपी की बात करे तो मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक बड़ा केंद्र है, और यहां एम्स बनने से इस पूरे क्षेत्र के लोगों को लाभ होगा।स्थानीय एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा मिलने से उसकी सुविधाएं, अनुसंधान और शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, और डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।किफायती इलाज: एम्स में फीस कम होती है और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं, जो आम जनता के लिए बहुत फायदेमंद होंगी।
एम्स एक शोध संस्थान भी होता है, जिससे मेडिकल रिसर्च और डॉक्टरों की ट्रेनिंग को बढ़ावा मिलेगा। इस मांग को लेकर कई बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और जनप्रतिनिधि भी इसे उठाते रहे हैं। अभी प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्त मंत्री सीता निर्मला रमण ने बजट से पूर्व प्रदेशों के वित्त मंत्री को बुलाया था। जिसमें प्रदेश के वित्त मंत्री ने एम्स की मांग की थी। वैसे भी मेरठ में सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक बन चुका है और एम्स के लिए पर्याप्त जमीन भी है। मेरठ में एम्स की स्थापना से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी, लोगों को दिल्ली पर निर्भरता कम होगी, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में क्रांति आएगी।
अब जरा मेडिकल कॉलेज पर नजर डालते है। कुल 151 एकड़ में बने मेडिकल काॅलेज में 51 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। मेडिकल कॉलेज का नर्सिग काॅलेज प्रदेश का एकमात्र कॉलेज है।जहां पर 282 सीटे है। फार्मेसी भी मेडिकल कॉलेज के परिसर में मौजूद है। वर्तमान में 6 पैरा मेडिकल कोर्स चल रहे है। जिसमें 430 सीटे है। मेडिकल परिसर में नया पैरा कॉलेज के प्रारंभ होने की प्रक्रिया चल रही है। मेडिकल में 7 सुपर स्पेस्लिटी विभाग है। 23 क्लीनकल ब्रांड स्पेसयलिटी विभाग है। 8 पैरा क्लीनकल विभाग है। 3 प्री क्लीनकल विभाग है मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 1186 बैड है। इतना ही नहीं यूजी बॉयज गर्ल्स के लिए हॉस्टिल मेें रहने की सीटें 450.350 है। जबकि पीजी में छात्राओ के पचास व फार्मसीव हास्टल के लिए 75 सीट जबकि नर्सिग हाॅस्टिल के लिए दो सौ सीटेहै। मेडिकल कालेज में प्राध्यापक व अन्य अधिकरियों के लिए 608 आवाासीय फ्लैट है।
इनका कहना है
इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा आर सी गुप्ता का कहना है। मेरठ के लिए एम्स की काफी जरूरत है। इसके वह 51 एकड़ पडी खाली जमीन को देने के लिए तैयार है। एम्स बनने इसका फायदा 14 जिलों के मरीजों को मिल सकेगा। जिन्हें दिल्ली व अन्य राज्य की ओर जाने के लिए मजूबर होना पड़ता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा अशोक कटारिया का कहना है कि अगर मेरठ में एम्स की स्थापना होती है। तो वेस्ट यूपी के मरीजों केा दिल्ली , एम्स अस्पताल एलएनजेपी व अन्य अस्पतालों पर दबाव कम होगा।
आईएमए के चिकित्सक डा अनिल नोसरान का कहना है मेरठ में एम्स की स्थापना होने से मेरठ ही नहीं वरन वेस्ट यूपी को इसका फायदा मिलेगा। जहां की मरीजों को दिल्ली अन्य स्थानों पर उपचार के लिए जाना पड़ता है।
राज्य सभा सांसद डा लक्षमी कांत वाजपेयी का कहना है वह लंबे समय से मेरठ में एम्स की मांग करते आ रहे है। इसके लिए बकायदा पत्रचार भी केन्द्रीय मंत्रियों से किया जा चुका है। संभवना है अगले महिने संसद में पेश होने वाले बजट में मेरठ को इसकी सौगात मिल सकती है।


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