छात्रों की फिटनेस जरूरी
 इलमा अज़ीम 
चालीस पार करते ही कई युवा बुढ़ापे की तरफ जा रहे हैं। जब इस बात का अध्ययन किया तो पता चलता है कि बचपन से लेकर अठारह वर्ष तक यानी विद्यार्थी जीवन में फिटनेस कार्यक्रम की कमी रही थी। साथ-साथ आजकल अपने आसपास पिछले एक वर्ष में दर्जनों युवाओं ने ह्रदयघात से दुनिया कोअलविदा कह दिया है।


 जब किशोर अवस्था में फिटनेस पर काम नहीं होगा तो ऐसे हालात आम देखने को मिलेंगे। जब मन का विकास स्कूल का काम है तो फिर विद्यार्थी के स्वास्थ्य का जिम्मेदार कौन? शिक्षण विषयों के रिपोर्ट कार्ड की तरह स्वास्थ्य के मानकों का रिपोर्ट कार्ड भी प्रत्येक विद्यार्थी का हर स्कूल में अनिवार्य रूप से हो, क्योंकि भाषा व अन्य शिक्षण विषयों की तरह ही स्वास्थ्य के मूल स्तंभ स्पीड, स्ट्रेंथ, इडोरैंस व लचक आदि का प्रायोगिक प्रशिक्षण भी उसी उम्र में शुरू करना होता है। शिक्षण विषयों के लिए तो स्कूलों के पास शिक्षक सहित पूरा प्रबंध है, मगर स्वास्थ्य के घटकों को विकसित करके उनका मूल्यांकन करने की कोई भी सुविधा आज तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।


 इस कॉलम के माध्यम से कई बार इस विषय पर स्कूलों व अभिभावकों को चेताया जा चुका है, मगर कोई भी समझने के लिए तैयार नहीं है। किसी भी देश को इतनी क्षति युद्ध या महामारी से नहीं होती है जितनी तबाही नशे के कारण हो सकती है। आज जब देश के अन्य राज्यों सहित हिमाचल प्रदेश में भी नशा युवा वर्ग पर ही नहीं किशोरों तक चरस, अफीम, स्मैक, नशीली दवाओं तथा दूरसंचार के माध्यमों के दुरुपयोग से शिकंजा कस रहा है। 
इसलिए सरकार, स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को इस विषय पर जरूरी कदम जल्दी ही उठा लेने चाहिए। यदि विद्यार्थी किशोरावस्था में नशे से बच जाता है तो वह फिर युवावस्था आते आते समझदार हो गया होता है। माध्यमिक से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को विभिन्न विद्याओं में व्यस्त रखने के साथ साथ शारीरिक फिटनेस की तरफ मोडऩा बेहद जरूरी हो जाता है। मानव का सर्वांगीण विकास शिक्षा के बिना अधूरा है। शिक्षा की परिभाषा में साफ-साफ लिखा है कि यहां शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से बराबर विद्यार्थियों का विकास करना है, जिससे वह आगे चलकर जीवन को सफलतापूर्वक खुशहाल जी सके। 


शारीरिक विकास के लिए खेलों के माध्यम से फिटनेस कार्यक्रम बहुत जरूरी हो जाता है। खेल ही वह माध्यम है जिसके द्वारा विद्यार्थी को नशे से दूर रखा जा सकता है। पढ़ाई के नाम पर ज्यादा समय खर्च करने के कारण फिटनेस के लिए कोई समय नहीं बचता है। आज का विद्यार्थी फिटनेस व मनोरंजन के नाम पर दूरसंचार माध्यमों का कमरे में बैठ कर खूब दुरुपयोग कर रहा है। ऐसे में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास की बात मजाक लगती है। आज के विद्यार्थी के लिए विद्यालय या घर पर आधे घंटे के फिटनेस कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। 

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