सैन्य सम्मान के साथ मेजर का हुआ अंतिम संस्कार 

 गांव में शव के पहुंचते ही मची चीख पुकार ,बेटे के ताबूत से लिपट कर रोई मां

मेरठ। देहरादून सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर मेरठ में उनके पैतृक गांव घसौली पहुंचा। शुभम का शव देखते ही गांव में चीख-पुकार मच गई। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हो गया। मां और बहन बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। परिवार वाले बार उन्हें संभालते, पानी के छींटे डालकर होश में लाते।

जैसे ही सेना के जवान पूरे सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ शुभम के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे, भाई-बहन जोर-जोर से रोने लगे। बहन ने आर्मी ऑफिसर से कहा- अब वो हमें कभी नहीं मिलेगा, पांच मिनट देख लेने दीजिए। बड़ा भाई पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़ता रहा। कहने लगा- एक बार बहन को शुभम का चेहरा दिखा दीजिए।

मां ताबूत को चूमती रही, बोलती रही- ट्रक में मेरा बेटा दूल्हा बनकर जा रहा है। ये सब लोग आज उसकी बारात में जा रहे हैं। दरअसल, मेजर शुभम की कार शनिवार को उत्तराखंड में बेकाबू होकर 50 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी। कई घंटों की मेहनत के बाद मेजर को रेस्क्यू किया गया था। गंभीर अवस्था में उनको देहरादून सैनिक अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टर ने उनको मृत घोषित कर दिया था।

27 साल के मेजर उत्तराखंड के चकराता में पोस्टेड थे। शनिवार सुबह वह किसी काम से देहरादून जा रहे थे। मेजर तीन भाई-बहन में दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई की फरवरी में शादी होनी है। शुभम 2015 में सेना में लेफ्टिनेंट पद पर भर्ती हुए थे। पिता भी सेना के रिटायर्ड सूबेदार हैं।

पहली पोस्टिंग पंजाब के भटिंडा में हुई थी

मेजर शुभम सैनी का परिवार आर्मी से जुड़ा हुआ है। पिता सत्येंद्र सैनी रिटायर्ड सूबेदार हैं। तीन भाई-बहन में वह दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई तुषार सैनी IT कंपनी में कार्यरत हैं। जबकि छोटी बहन निधि सैनी आर्मी स्कूल में टीचर हैं।

पिता ने बताया- वह 2019 में कमीशंड होकर सेना में लेफ्टिनेंट बने थे। इसके बाद प्रमोशन पाते हुए मेजर तक पहुंचे थे। आर्मी स्कूल से इंटरमीडिएट पास करने के बाद उनका 2015 में एनडीए से सिलेक्शन हुआ था। पासिंग आउट परेड 2019 में देहरादून में हुई थी। उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब के भटिंडा में थी।

बड़े भाई की फरवरी में थी शादी

मेजर शुभम सैनी, उनके बड़े भाई और छोटी बहन, तीनों की शादी नहीं हुई थी। बड़े भाई की शादी 18 फरवरी को तय थी। पिता ने बताया- हादसे के एक दिन पहले शुक्रवार को फोन पर बातचीत हुई थी। शादी की तैयारियों के बारे में जानकारी ली और छुट्‌टी लेकर घर आने की बात कही थी।

पिता सत्येंद्र ने बताया शुभम को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। वह स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से अपनी तैयारी करता था।

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