भारतीय संस्कृति का विनाश नहीं हो सका क्योंकि भारतीय संस्कृति का मूल धर्म है-संत शाश्वत सरस्वती महराज
गांधी नगर हिंदू सम्मेलन में लिया बड़ी संख्या में भाग
मेरठ। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ शताब्दी वर्ष में 11 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक पुरे मेरठ प्रान्त में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, आज मेरठ महानगर में भी अनेकों स्थानों पर हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सूरज कुंड, गाँधी नगर में कैलाश शिव मंदिर में हिन्दू सम्मेलन के आयोजन में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियो ने पूरे हर्ष उल्लास के साथ भाग लिया।
समिति द्वारा आयोजित हिन्दू सम्मेलन में संत शाश्वत सरस्वती महाराज ने कहा कि जहाँ अनेकों सभ्यता नष्ट हो गयी है, परन्तु भारतीय संस्कृति का विनाश नहीं हो सका क्योंकि भारतीय संस्कृति का मूल धर्म है, परंतु आज भारतीय संस्कृति के मूल को समाप्त करने का प्रयास चल रहा है इसकी जड़ों को काटा जा रहा है, यह एक प्रश्न है कि हिंदू कौन है, उन्होंने कहा की "विराट सागर समाज अपना, हम सब इसके बिंदु है, सनातन आर्य बौद्ध जैन सिख हम सब हिंदू हैं "
सृष्टि की रचना से ॐ मंत्र प्रारंभ हुआ जहां-जहां पर ॐ है वही हिंदू है, चाहे सनातनी हो, आर्य समाज हो, जैन हो, बौद्ध हो, सिख हो सभी में ॐ है, हमारा इतिहास बड़ा गौरवशाली है कभी पूरे विश्व में हिंदू ही हिंदू हुआ करता था, सऊदी, ईरान, इराक, अफगानिस्तान में भी हिंदू था, आज भी इंडोनेशिया, थाईलैंड चीन में हिंदू मंदिर है हिंदू जीवन शैली है, परंतु आज यह विचारणीय है कि पूरे विश्व का हिंदू आज एक छोटे से देश में समा रहा है, आज सत्ता परिवर्तन की वजह से पलायन रुका है लेकिन कब तक? हमको लड़ना पड़ेगा हम लड़ेंगे,अड़ेंगे और आगे बढ़ेंगे, और हमको अपने समाज की कुछ कुरीतियों को भी छोड़ना पड़ेगा,आज हिंदू समाज के सामने सबसे बड़ी कुरीति जातिवाद है हिंदू जाति में बंट गया है इस जातिवाद ने हिंदू समाज को बहुत कमजोर किया है, हमको जाति को छोड़कर धर्म की ओर बढ़ना पड़ेगा, हिंदू समाज जनसंख्या में बहुत कम होता जा रहा है अगर पूरे विश्व में हिंदू घटेगा तो मानवता खत्म होगी, क्योंकि हिंदू संस्कृति में ही मानवता सुरक्षित है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत के सद्भाव संयोजक अरुण जिंदल ने कहा कि भारत देश लाखों वर्ष पुराना है, विदेश से थोड़े से लोग आते और हम पर राज करते, हमारे पशुधन, स्त्री धन को लूट कर ले जाते, उसके बाद अंग्रेज आए उन्होंने हमको हमारी जड़ों से ही काट दिया परिणाम यह हुआ कि हम गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग बोलने लगे और हम राम-राम, जय सियाराम भूल गए। परिणाम यह हुआ कि भारत के लोग यह भूल गए कि भारत हमारा देश है।
ऐसे में 1889 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केशव बलिराम का जन्म हुआ, उनके मन में यह प्रश्न था कि विश्व गुरु भारत गुलाम क्यों हुआ, उन्होंने पाया कि इतना विशाल हिंदू समाज आज जाति में, पंथ में, क्षेत्र वाद में बंट गया है, हिंदू समाज को एक करने के लिए भारत माता को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए 1925 में डॉक्टर केशव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनेकों संगठन सेवा भारती,विद्या भारती,वनवासी कल्याण आश्रम, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,विश्व हिंदू परिषद अपने-अपने क्षेत्र में सर्वोच्च संगठन के रूप में भारत माता की सेवा कर रहे हैं, संघ के स्वयंसेवक ने बिना किसी की आज्ञा के केवल एक स्वयंसेवक के नाते कोरोना काल में स्वतः ही पूरे देश की सेवा करें,संघ ने शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन के विषय पर समाज से आग्रह किया कि हम राम की गिलहरी के रूप में पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज की सुरक्षा का वचन ले । समिति के अध्यक्ष कैप्टन राजेश शर्मा ने सभी का धन्यवाद दिया, कार्यक्रम को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष कैप्टन राजेश शर्मा, महामंत्री अमित शर्मा, अभिषेक गर्ग, वर्षा सैनी का विशेष योगदान रहा , महानगर में मलियाना, कंकर खेड़ा प्रताप नगर, जागृति विहार में भी कार्यक्रम रहे।


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