ग्रामीण बाजार में वृद्धि
राजीव त्यागी
देश में ग्रामीण बाजार शहरी बाजार की तुलना में तेज़ गति से बढ़ रहे हैं। हाल ही में 7 जनवरी को वाहन डीलरों के संगठन फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाड़ा) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष 2024 में यात्री वाहनों की बिक्री वृद्धि में ग्रामीण बाजार शहरी बाजार से आगे निकल गया।
शहरी बाजारों में यात्री वाहनों की बिक्री 8 फीसदी बढ़ी, वहीं ग्रामीण इलाकों में इसमें 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। दरअसल किसानों की आमदनी बढ़ने से गांवों में खपत बढ़ रही है और इससे ग्रामीण बाजार को रफ्तार मिल रही है। ग्रामीण गरीबी में कमी, छोटे किसानों की साहूकारी कर्ज पर निर्भरता में कमी और किसानों का जीवन स्तर बढ़ने जैसी विभिन्न अनुकूलताओं से ग्रामीण बाजार मजबूती की राह पर आगे बढ़ रहा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण सुधार, बेहतर कृषि उत्पादन, ग्रामीण वेतन वृद्धि, ग्रामीण उपभोग में बढ़ोतरी तथा कर सुधार जैसे घटकों के दम पर भारत के ग्रामीण बाजार तेजी से आगे बढ़े हैं। इन सबके बावजूद देश के छोटे और सीमान्त किसान वर्तमान में भी आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। छोटे किसान ऑनलाइन खरीदारी में दुनिया में बहुत पीछे हैं।
ग्रामीण जनजीवन के करीब 22 फीसदी लोगों की कर्ज के लिए साहूकारों और अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता बनी हुई है। यह वर्ग अभी भी ऊंची ब्याज दर पर कर्ज ले रहा है। ऐसे में गांवों में बैंक शाखा विस्तार के अलावा दूसरे अन्य कदम उठाने की जरूरत है। औपचारिक ऋणों के लिए बेहतर प्रोत्साहन और डिजिटल उपकरणों से लैस बैंक प्रतिनिधियों को ग्रामीण परिवारों और संस्थानों के बीच समन्वय का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) की भूमिका को प्रभावी बनाना होगा। साथ ही गांवों में प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना का तेजी से विस्तार करना होगा, इससे छोटे किसानों की संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ाई जा सकेगी।




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