यूजीसी विवाद 

उत्पीड़न के नाम पर दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा- धर्मेंद्र प्रधान

 नयी दिल्ली। यूजीसी के नए रेगुलेशन पर विवाद गहरा गया है।  इस पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान आया है।  उन्होंने कहा है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।  उधर, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें इन नियमों की 'जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा' को चुनौती दी गई है। 

 इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है, मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा। कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। किसी का उत्पीड़न नहीं होगा।  उधर, यूजीसी के नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।  इसमें कहा गया है कि इन नियमों में जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है. साथ ही संस्थागत सुरक्षा से कुछ श्रेणियों को बाहर कर दिया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है, हाल ही में यूजीसी ने जो गाइडलाइन जारी की है वो गैर-समावेशी है. याचिका में नियमों की इन आधार पर आलोचना की गई है कि जातिगत भेदभाव को सख्ती से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है.आइए जानते हैं कि इस याचिका में और क्या-क्या कहा गया है.

जाति-आधारित भेदभाव का दायरा सिर्फ एससी, एसटी और ओबीसी तक सीमित करके यूजीसी ने सामान्य वर्ग को संस्थागत सुरक्षा और उनकी शिकायत निवारण से असल में इनकार किया है। ये भी नहीं विचार किया गया कि इस वर्ग को भी अपनी जाति की पहचान के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है।

यह नियम अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) और 15(1) (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक) के तहत मिले मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। यह नियम संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, जिसमें सम्मान के साथ जीने का अधिकार शामिल है) के खिलाफ है। 

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