4 बोतल खून के लिए मेरे पति को मार डाला!

 पत्नी बोली- हॉस्पिटल ने बिल बनाने को ड्रामा रचा; सुसाइड नहीं मर्डर है

मेरठ। मेरे पति सुसाइड नहीं नहीं कर सकते हैं। उनका मर्डर हुआ है। मेरे पति को खून की कमी थी तो हॉस्पिटल ने उन्हें  आईसीयू में क्यों भर्ती किया। हॉस्पिटल वालों ने बड़ा बिल बनाने के लिए पूरा ड्रामा रचा है। उन्हें हॉस्पिटल की खिड़की से नीचे फेंका गया है। लोकप्रिय हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल से गिरकर मरने वाले संजय की पत्नी ने ये बात कही। 

उन्होंने सवाल किया कि जब पति संजय आईसीयू में थे तो उनका स्टाफ ने ध्यान क्यों नहीं दिया। पूरी जिम्मेदारी नाइट शिफ्ट के स्टाफ की है। वे खुद टॉयलेट कैसे चले गए। अगर किसी स्टाफ के द्वारा भी उन्हें वहां ले जाया गया था तो फिर संजय ने अंदर से दरवाजा कैसे लगा लिया?

संजय कुमार मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर कांगड़ा के रहने वाले थे। संजय इन्वर्टर कंपनी में काम करता था। वह अपनी पत्नी ज्योति और एक बेटे शुभांक के साथ मेरठ के हाईडिल कालोनी के पास रहते हैं। पिछले कुछ दिन से संजय की तबीयत खराब चल रही थी, जिनका इलाज डा. पीके शुक्ला की देखरेख में चल रहा था।

सांस लेने में दिक्कत की शिकायत थी। टेस्ट में खून की कमी आई और डॉक्टर ने संजय को खून चढ़ाने की सलाह दी। 31 दिसंबर की देर रात संजय को गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां उनका आईसीयू में इलाज चल रहा था।

15 मिनट पहले घर गई तभी मौत की सूचना आई

ज्योति ने बताया- रात को जब वह घर खाना खाने जाती थीं तो स्टाफ को बताकर जाती थी। क्योंकि वैसे भी स्टाफ अंदर जाने नहीं देता था। घर पहुंचते ही अस्पताल से फोन आ गया। कॉलर ने बताया कि उनके पति की दूसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई है।वहां से दौड़ते हुए घर आई। देखा संजय जहां गिरे वहां खून ही खून था। सब कुछ खत्म हो गया था। ज्योति ने कहा- 15 मिनट के अंतराल में ही कुछ ऐसा हुआ है, जिसे छिपाने का प्रयास हो रहा है।

ज्योति ने कहा- चार यूनिट खून के लिए हॉस्पिटल ने उनके पति की जान ले ली है। सवाल उठाए कि क्या शरीर का चार यूनिट खून कम होने से कोई व्यक्ति इतनी क्रिटिकल कंडीशन में पहुंच जाता है कि उसे ICU में रखना पड़ता है।संजय को कोई बीमारी नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया जाता था। हॉस्पिटल का बड़ा बिल बनाने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा गया और अब वह अपने पति की लाश लेकर जा रही हैं।

खिड़की इतनी ऊंची तो कैसे कूदे संजय

ज्योति का कहना है कि संजय को तीन यूनिट खून चढ़ चुका था और चौथा यूनिट खून शनिवार को चढ़ना था। उससे पहले ही संजय की मौत हो गई। संजय की हालत से वह वाकिफ थीं, इसलिए सवाल उठा रही हैं।

पत्नी ज्योति का कहना है कि इतनी कमजोरी में संजय बाथरूम की खिड़की तक कैसे चढ़े। खिड़की के आस पास खून लगा है। इसका मतलब गिरने से पहले ही संजय के शरीर से खून निकल रहा था। सबसे बड़ी बात कि ICU के स्टाफ को कांच टूटने और संजय के नीचे गिरने की भनक क्यों नहीं लगी। वह तो नीचे लोगों ने शोर मचाया, तब स्टाफ दौड़ा।

हंसी ठहाके के बीच गुजरा पूरा दिन

संजय दो बहन और चार भाई थे। उनकी तबीयत खराब होने की सूचना पर शुक्रवार सुबह दिल्ली में रहने वाली उनकी दोनों बहने भी आई थीं। संजय की हालत में सुधार देखकर वह संतुष्ट थीं। संजय भी हंस हंसकर अपनी बहनों से बात कर रहे थे। लेकिन क्या पता था कि वह भाई-बहनों की वह आखिरी मुलाकात थीं।बहनें शाम को अपने घर पहुंची भी नहीं थी कि संजय की मौत की सूचना उनसे पहले घर पहुंच गई। रात में ही परिजन मेरठ के लिए रवाना हो गए।

डॉ पीके शुक्ला ने कहा- मैं खुद हैरान हूं, उसने ऐसा क्यों किया?

मरीज का इलाज करने वाले डॉ पीके शुक्ला ने कहा- मरीज को एनीमिया की समस्या थी, तीन यूनिट खून उनको अभी तक चढ़ाया जा चुका था। जिसका इंतजाम उनके दोस्तों द्वारा किया गया था। मरीज से जब मेरी बात हुई तो वह आज कह रहा था कि मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।मानसिक रूप से मरीज बिल्कुल स्वस्थ था, मैं खुद हैरान हूं कि उसने ऐसा क्यों किया। हालांकि एक बात मैंने देखी कि मरीज से उसके परिजन कम मिलने आते हैं। शायद उसकी पत्नी या किसी परिजन से कोई विवाद हुआ हो, जिसको लेकर उसने ऐसा कदम उठाया हो।समझ नहीं आया कि इसकी क्या फैमिली प्रॉब्लम थी। बाकी और कोई समस्या नहीं थी। तीन दिन में तीन बोतल खून चढ़ाया गया है। एनीमिया को कवर करने के लिए आज टेस्ट कराया, आज तो हीमोग्लोबिन भी अच्छा आया था।आज रात ही 8 बजे मैंने मरीज को देखा था। उस समय वो सही था। मैंने उससे पूछा भी कैसे हो, तो उसने कहा था कि मैं ठीक हूं। बाकी ऐसी कोई समस्या अभी तक हमारे सामने नहीं आई है।

फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी रात में लोकप्रिय अस्पताल पहुंचे थे। उनके साथ इंस्पेक्टर नौचंदी ईलम सिंह भी रहे। उन्होंनेआईसीयू के स्टाफ से पूछताछ की और फिर फोरेंसिक टीम को बुला लिया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और लौट गई। तब तक बाथरूम और खून वाले स्थान तक किसी को जाने नहीं दिया गया।

 बोले अस्पताल के अधिकारी 

लोकप्रिय अस्पताल ने अपना बयान जारी किया है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी परमजीत रावत ने कहा-संजय नाम का मरीज 31 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था। उसके बाद में आज आईसीयू में ही था। वह टॉयलेट जाने के लिए उठा। उसके साथ एक स्टाफ उसको लेकर गया। स्टाफ बाहर खड़ा हुआ था। मरीज टॉयलेट के अंदर था, पहले वह बाहर आया, फिर दोबारा से अंदर गया उसने गेट बंद कर लिया। शीशा तोड़कर बाहर की तरफ कूद गया।

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