यूपी पुलिस भर्ती

 32,679 पदों पर आयु सीमा का विवाद गहराया, भाजपा विधायकों ने ही सीएम योगी को घेरा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा निकाली गई 32,679 पदों (PAC और जेल वार्डर) की भर्ती अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। आयु सीमा में छूट न मिलने से नाराज अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष के साथ-साथ सत्ताधारी भाजपा और सहयोगी दलों के कुछ विधायकों ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

सिद्धार्थनगर की मेंहदावल सीट से निषाद पार्टी के विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री से कहा कि 18 नवंबर 2025 को गोरखपुर और 15 दिसंबर को लखनऊ के जनता दरबार में उन्होंने अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट देने का आश्वासन दिया था, लेकिन नोटिफिकेशन में इस वादे को नजरअंदाज किया गया। पत्र में यह भी कहा गया कि लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है।

विधायकों का तर्क है कि पीएसी और जेल वार्डर के पदों पर 2018 के बाद से कोई भर्ती नहीं निकली है। सात साल की लंबी अवधि में भर्ती न होने के कारण कई योग्य युवा अब ओवरएज हो गए हैं। उन्होंने आयु सीमा को 22 वर्ष से बढ़ाकर 25 वर्ष करने की मांग की है।

इस संबंध में पत्र लिखने वालों में शामिल हैं:

डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, भाजपा विधायक, देवरिया

दिनेश रावत, विधायक

अनिल कुमार त्रिपाठी, निषाद पार्टी विधायक

विपक्ष ने भी इस मुद्दे का फायदा उठाया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा केवल झूठे वादे करती है, जिसका प्रमाण उनके विधायकों के पत्र में दिखाई दे रहा है।अब सवाल यह है कि सरकार इस मांग पर कितना जल्दी कार्रवाई करती है और युवाओं की नाराजगी को कैसे शांत कर पाती है।



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